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जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, 38 साल वायुसेना में दी सेवा; जानें क्या होगी जिम्मेदारी

जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, 38 साल वायुसेना में दी सेवा; जानें क्या होगी जिम्मेदारी

अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO मिल गया है। सूत्रों के मुताबिक, सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना गया है। ट्रस्ट की ओर से उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की जाएगी।

जितेंद्र मिश्रा को नियुक्ति की तारीख से तीन साल के कार्यकाल के लिए CEO की जिम्मेदारी दी गई है। वह अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए थे। अब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कामकाज की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।

38 साल तक भारतीय वायुसेना में रहे जितेंद्र मिश्रा

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा है। उन्होंने भारतीय वायुसेना में 38 वर्षों तक सेवाएं दीं। अपने करियर के दौरान वह लड़ाकू विमान पायलट, कॉम्बैट इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे।

उन्हें ऑपरेशन सिंदूर और 1999 के कारगिल युद्ध से जुड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी जाना जाता है। सैन्य सेवा के दौरान उनके अनुभव को देखते हुए राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी के लिए उनका चयन काफी अहम माना जा रहा है।

3,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से संबंध रखने वाले जितेंद्र मिश्रा ने NDA खड़कवासला से प्रशिक्षण लिया है। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव बताया जाता है।

सैन्य सेवा में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रशासन, अनुशासन और बड़े स्तर पर संचालन का उनका अनुभव राम मंदिर जैसी विशाल व्यवस्था के प्रबंधन में उपयोगी माना जा रहा है।

5,500 से ज्यादा उम्मीदवारों में हुआ चयन

राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति के लिए व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई थी। इस पद के लिए 5,500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। लंबी स्क्रीनिंग प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की संख्या कम की गई और अंतिम दौर के लिए करीब 18 नामों को शॉर्टलिस्ट किया गया।

चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की केवल पेशेवर योग्यता ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत और धार्मिक दृष्टिकोण से जुड़े पहलुओं को भी परखा गया। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों से खान-पान, रहन-सहन और हिंदू धार्मिक मान्यताओं से संबंधित सवाल भी पूछे गए थे।

तीन सदस्यीय कमेटी ने की चयन प्रक्रिया

CEO के चयन के लिए ट्रस्ट की ओर से तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल थे।

कमेटी ने आवेदनों की समीक्षा और उम्मीदवारों के इंटरव्यू के बाद अपनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद CEO के नाम को लेकर ट्रस्ट के समक्ष निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

CEO के पास होगी मंदिर के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO का पद केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं होगा। CEO को मंदिर से जुड़े प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी मामलों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।

इसके अलावा मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय, श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं और बड़े आयोजनों की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की जिम्मेदारी भी CEO के कार्यक्षेत्र का हिस्सा हो सकती है। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर से जुड़े व्यापक स्तर के संचालन को देखते हुए CEO की नियुक्ति को ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

तीन साल तक संभालेंगे CEO की जिम्मेदारी

सूत्रों के मुताबिक, जितेंद्र मिश्रा नियुक्ति की तारीख से तीन वर्षों तक राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के पद पर रहेंगे। अब उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा का इंतजार है। आधिकारिक ऐलान के बाद यह स्पष्ट होगा कि CEO के कार्यक्षेत्र में कौन-कौन सी जिम्मेदारियां शामिल होंगी और मंदिर प्रशासन के संचालन में नई व्यवस्था किस तरह लागू की जाएगी।

राम मंदिर प्रशासन में नए दौर की शुरुआत

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के साथ राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में एक नई व्यवस्था की शुरुआत हो रही है। लंबे सैन्य अनुभव वाले अधिकारी को CEO की जिम्मेदारी दिए जाने से मंदिर के प्रबंधन में अनुशासन, संचालन और प्रशासनिक समन्वय को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।


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