नई दिल्ली/अहमदाबाद। भारत के विमानन क्षेत्र में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने अगले 10 वर्षों के दौरान देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस परियोजना पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने अहमदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देश के एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार को लेकर सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने और छोटे शहरों तक विमानन सेवाएं पहुंचाने के लिए आने वाले दशक में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।
अहमदाबाद से तीसरी हब एंड स्पोक सेवा की शुरुआत
अहमदाबाद एयरपोर्ट से देश की तीसरी हब एंड स्पोक ऑपरेशन सेवा का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे। इस मॉडल का उद्देश्य छोटे और क्षेत्रीय शहरों के यात्रियों को प्रमुख हवाई केंद्रों से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इसके जरिए यात्रियों को बड़े एयरपोर्ट के माध्यम से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। मंत्री ने बताया कि इससे पहले वाराणसी और अमृतसर में भी इस तरह की व्यवस्था शुरू की जा चुकी है, जहां यात्रियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
छोटे शहरों तक हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर
केंद्र सरकार की योजना केवल नए एयरपोर्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने पर भी फोकस किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य ऐसे शहरों और क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है, जहां अभी तक विमानन सुविधाएं सीमित हैं। इससे यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में समय की बचत होगी और छोटे शहरों की आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन तथा व्यापार को भी गति मिल सकती है।
74 से बढ़कर 166 हुआ एयरपोर्ट नेटवर्क
राम मोहन नायडू ने देश के विमानन क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में परिचालन वाले एयरपोर्ट की संख्या लगभग 74 थी, जो अब बढ़कर 166 तक पहुंच गई है। इस दौरान नए एयरपोर्ट के साथ-साथ कई जगहों पर नए टर्मिनल और विमानन सुविधाओं का भी विस्तार किया गया। मंत्री के अनुसार, बीते वर्षों में औसतन लगभग हर 40 दिन के आसपास एक नया एयरपोर्ट या टर्मिनल तैयार होने जैसी गति से बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है।
UDAN योजना से बदलेगा क्षेत्रीय विमानन का स्वरूप
सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना उड़ान (UDAN) को देश के विमानन विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य आम यात्रियों के लिए हवाई सफर को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है। विशेष रूप से छोटे और मध्यम शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए इस योजना के तहत नए रूट और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में नए एयरपोर्ट बनने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी और देश का एविएशन नेटवर्क तेजी से विस्तृत होगा।
संशोधित UDAN योजना के लिए हजारों करोड़ का प्रावधान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी वर्ष मार्च में क्षेत्रीय संपर्क योजना के संशोधित स्वरूप को मंजूरी दी थी। इस परियोजना के क्रियान्वयन और विस्तार के लिए सरकार ने करीब 28,840 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय का प्रावधान किया है। करीब 30 हजार करोड़ रुपये के इस निवेश के जरिए सरकार का लक्ष्य देश के विमानन ढांचे को नई ऊंचाई तक पहुंचाना है।
क्या होगा 100 नए एयरपोर्ट बनने का फायदा?
देश में नए एयरपोर्ट विकसित होने से कई क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से छोटे शहरों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी मिल सकती है। यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ेंगे। पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिल सकती है। स्थानीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रमुख एयरपोर्ट पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी तक पहुंच आसान हो सकती है।
भारत के एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा रोडमैप
भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल है। घरेलू यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना को भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक बड़े रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह योजना तय समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो देश के छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों तक हवाई यात्रा की पहुंच और अधिक व्यापक हो सकती है। फिलहाल सरकार का फोकस नए एयरपोर्ट निर्माण, क्षेत्रीय हवाई संपर्क और आधुनिक विमानन सुविधाओं के विस्तार के जरिए भारत के एविएशन नेटवर्क को मजबूत बनाने पर है।