उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही देवी आराधना का विशेष माहौल बन गया है। महाकालेश्वर मंदिर के समीप स्थित प्रसिद्ध हरसिद्धि माता मंदिर में नवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नौ दिनों तक मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, आकर्षक श्रृंगार, नवचंडी पाठ और हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। इस दौरान मंदिर के प्राचीन दीप स्तंभों पर दीप प्रज्वलन श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा।
रात 11 बजे तक होगे दर्शन
नवरात्रि के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्तों के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है। जिसको देखते हुए दर्शन के लिए रात 11 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक धार्मिक गतिविधियां चलेंगी। माता के दर्शन, पूजा और आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा।
प्रतिदिन सुबह 7 बजे होगी मंगला आरती
नवरात्र के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त में घट स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की गईं। मंदिर के गर्भगृह में पांच कलश स्थापित हुए और माता के अभिषेक के बाद विशेष श्रृंगार किया गया। प्रतिदिन सुबह 7 बजे मंगला आरती और शाम 7 बजे संध्या आरती होगी।
नौ दिनों तक शयन आरती नहीं की जाएगी
तो वही नौ दिनों तक माता की शयन आरती नहीं की जाएगी। मंदिर के पुजारी रामचंद्र गिरी के अनुसार, नवरात्र में माता के दर्शन और साधना का विशेष महत्व है। इस दौरान माता भगवती के अलग-अलग श्रृंगार होंगे और श्रद्धालु उनके रजत मुखौटे के दर्शन कर सकेंगे। दशमी तिथि से शयन की परंपरा फिर शुरू होगी। 11 से 19 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्र में देशभर से भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है।
51 शक्तिपीठों में शामिल है मंदिर
हरसिद्धि माता मंदिर महाकाल मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि माता सती की कोहनी महाकाल वन में इसी स्थान पर गिरी थी। इसी कारण इसे प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। मंदिर का संबंध कवि कालिदास की आराधना परंपरा से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 खंड किए थे। जिन स्थानों पर उनके अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए।
दोनों स्तंभों पर कुल 1011 दीपक किए गए प्रज्वलित
मंदिर परिसर में मौजूद करीब 51 फीट ऊंचे दो प्राचीन दीप स्तंभ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। मंदिर के सहायक प्रशासक इंद्रेश लोधी के मुताबिक, दोनों स्तंभों पर कुल 1011 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। इन्हें रोशन करने में लगभग 60 लीटर तेल और चार किलो रुई की बातियां लगती हैं। दीप प्रज्वलन की प्रक्रिया में करीब 40 मिनट लगते हैं और छह लोग मिलकर यह कार्य करते हैं। उज्जैन का जोशी परिवार करीब 100 वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह परंपरा निभा रहा है।