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80 साल पुराने साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक, अब ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित होगा पीएमओ...

80 साल पुराने साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक, अब ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित होगा पीएमओ...

नई दिल्ली: रायसीना हिल स्थित ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक में शुक्रवार शाम चार बजे आखिरी कैबिनेट बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक बेहद खास मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद करीब 80 साल पुराने इस प्रधानमंत्री कार्यालय को औपचारिक रूप से अलविदा कहकर नए परिसर ‘सेवा तीर्थ-1’ में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बने इस नए परिसर का निर्माण लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के लिए अलग-अलग आधुनिक भवन तैयार किए गए हैं।

साउथ ब्लॉक को अलविदा कहने से पहले सांकेतिक बैठक:

सरकारी सूत्रों के अनुसार, साउथ ब्लॉक में होने वाली यह आखिरी कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सांकेतिक महत्व भी रखती है। आजादी के बाद से अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय का संचालन यहीं से होता रहा है, इसलिए इस ऐतिहासिक बदलाव को औपचारिक रूप देने के लिए विशेष बैठक आयोजित की जा रही है।

1,189 करोड़ की लागत से तैयार हुआ ‘सेवा तीर्थ’ परिसर:

नए प्रशासनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का निर्माण सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत किया गया है। कुल क्षेत्रफल: 2,26,203 वर्ग फुट, निर्माण एजेंसी: लार्सन एंड टुब्रो, अलग भवन: पीएमओ, कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय बताया जा रहा है कि कैबिनेट सचिवालय पहले ही सितंबर में ‘सेवा तीर्थ-2’ में स्थानांतरित हो चुका है, जबकि ‘सेवा तीर्थ-3’ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनेंगे ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’:

पीएमओ के पूरी तरह शिफ्ट होने के बाद ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को सार्वजनिक संग्रहालय में बदलने की योजना है। इस संग्रहालय का नाम ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ प्रस्तावित है, जहां भारत के प्रशासनिक और ऐतिहासिक विकास से जुड़ी विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

क्यों खास है यह बदलाव:

आजादी के बाद पहली बार पीएमओ ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से बाहर जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस नए प्रशासनिक परिसर में कामकाज होगा, पुराने शक्ति-केंद्र को संग्रहालय में बदलकर जनता के लिए खोला जाएगा, यह बदलाव भारत के प्रशासनिक ढांचे में ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


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