लोकेशन: डोंगरगढ़ | रिपोर्टर: राजा शर्मा
डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में शिक्षकों ने अपनी लंबित विभागीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, ब्लॉक इकाई डोंगरगढ़ के बैनर तले शिक्षकों ने तहसील कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना देकर दस सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग उठाई। शिक्षकों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं हुआ है।
सेवा पुस्तिका और GPF पासबुक के सत्यापन की मांग
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की प्रमुख मांगों में सेवा पुस्तिका का स्थानीय समन्वयक, कोष एवं लेखा कार्यालय से सत्यापन और GPF पासबुक का विकासखंड शिक्षा अधिकारी से सत्यापन कराना शामिल है। एसोसिएशन के अनुसार, इन प्रक्रियाओं में देरी के कारण शिक्षकों को विभागीय कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वर्षों से लंबित भुगतान का मुद्दा भी उठा
शिक्षकों ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने के दौरान किए गए यात्रा व्यय के टीए बिलों का भुगतान लंबित होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद भी यात्रा भत्ते की राशि समय पर नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा, पांचवीं और आठवीं बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों के पारिश्रमिक भुगतान में देरी का मामला भी प्रदर्शन के दौरान सामने रखा गया। एसोसिएशन का दावा है कि संबंधित भुगतान के लिए उच्च कार्यालय से राशि प्राप्त होने के बावजूद शिक्षकों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
पहले भी अधिकारियों को दी गई थी जानकारी
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, इन समस्याओं को पहले विकासखंड शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में लाया गया था। लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण शिक्षकों को प्रदर्शन करना पड़ा। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि सभी लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण किया जाए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन लगातार कर रहे हैं, लेकिन विभागीय समस्याओं और लंबित भुगतानों के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।
अब देखना होगा कि शिक्षकों की दस सूत्रीय मांगों पर शासन-प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है। फिलहाल, डोंगरगढ़ के शिक्षक लंबित समस्याओं के समाधान और अपने बकाया भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।