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भारत के लिए बड़ी बढ़ी चिंता, कच्चे तेल की कीमतों में एक बार हुआ इजाफा, पहुंचा 105 डॉलर प्रति बैरल

भारत के लिए बड़ी बढ़ी चिंता, कच्चे तेल की कीमतों में एक बार हुआ इजाफा, पहुंचा 105 डॉलर प्रति बैरल

Crude Oil Price: पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अब एक एक फिर फिर दोनों  देशों के बीच युद्ध की स्थिति निर्मित हो गई है। जिसका असर यह की हुआ कि इंटरनेशनल में मार्केट में कच्चे तेल की  में भारी उछाल आया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गया है वही  भारतीय बास्केट में क्रूड की कीमत बुधवार को 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। 

दोनों देशों के बीच युद्ध के चलते अंतर्राष्टीय बाजार में कच्चा तेल महंगा  बना हुआ है। ऐसे में अब ये फिर सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इस तनाव के बीच सरकार और तेल कंपनिया कैसे इस समस्या से निपटेगी और क्या इसका पट्रोल डीजल की कीमतों में भी सकता है। लेकिन अभी इनकी बढ़ोतरी को  लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है।  लेकिन तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे ने सरकार के सामने चुनौती जरूर बढ़ा दी है.

भारत की बढ़ी चिंता ?

आपको  बता दें की दुनियाभर में भारत सबसे ज्यादा 90% कच्चे तेल का आयत करता है और कच्चे तेल का आयात अधिक में मात्रा में  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होता है। इसीलिए अगर कच्चे तेल के दामों में इजाफा अगर इजाफा होता है तो इसका सीधा असर देश के आयत बिल पर पड़ता है। जानकारी के मुताबिक जब फरवरी  महीने के अंत से जब युद्ध शुरू हुआ था तब से लगातार कच्चे  तेल के कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। जिसका असर सबसे ज्यादा मई महीने में देखने को मिला था। इस दौरान चार बार पेट्रोल- डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी और बढ़ते दामों के कारण आयत  की कमी से  पेट्रोल- डीजल  का संकट उत्पन्न हो गया था। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से जुलाई के बीच भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल 56.5% बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस अवधि में कच्चे तेल के आयात की मात्रा में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में आयात खर्च में हुई तेज बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्रूड की ऊंची कीमतें मानी जा रही हैं।अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत के ट्रेड डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ने की आशंका है। वहीं, महंगा क्रूड आने वाले समय में ईंधन और दूसरी वस्तुओं की लागत बढ़ाकर महंगाई का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

क्या बढ़ सकते है पेट्रोल- डीजल के भाव?

ये कहना जल्दबाजी  कि एक बार फिर अब पेट्रोल - डीजल के दामों में इजाफा हो सकता है क्यूंकि भारत भले ही अपने जरुरत के लिए कच्चे तेल का आयातक है। लेकिन देश पूरी  तरह कच्चे  के लिए एक ही देश पर आश्रित नहीं है भारत में कच्चा तेल कई देशों से आता है, जिससे एक देश से अगर रास्ता बंद हो जाये तो एक ही देश पर निर्भरता नहीं रहेगी। लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए ये उम्मीद लगाई  रही है कि शायद पेट्रोल- डीजल के दाम बढ़ सकते है। लेकिन भारत सरकार  ने इसकी तैयारी कर ली है,देश के पास पेट्रोल- डीजल का भरपूर भंडारण है, तो हो सकता है कि ईंधन की कीमतों पर इसका फर्क ना पड़े.

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रुपया भी कमजोर हुआ

एक ओर दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ इसका दबाव तेल कंपनियों पर भी बढ़ रहा है। महंगे क्रूड के बीच डॉलर को मजबूती मिली है, जिसका असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दिया। आज रुपया 0.2% कमजोर होकर 95.30 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो करीब 10 दिनों में इसका सबसे निचला स्तर है।


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