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BRICS Summit 2026: गलवान के बाद पहली बार मोदी-जिनपिंग की बड़ी मुलाकात, 12 सितंबर पर टिकी नजरें

BRICS Summit 2026: गलवान के बाद पहली बार मोदी-जिनपिंग की बड़ी मुलाकात, 12 सितंबर पर टिकी नजरें

नई दिल्ली: BRICS Summit 2026: भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी खटास आई थी। ऐसे में दोनों नेताओं की प्रस्तावित मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।

सात साल बाद भारत पहुंचेंगे शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर की सुबह उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। अक्टूबर 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित अनौपचारिक भारत-चीन शिखर बैठक के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। उनके साथ चीन के वरिष्ठ अधिकारी, राजनयिक सलाहकार और कारोबारी प्रतिनिधि भी भारत आ सकते हैं। ऐसे समय में जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों में आई दूरी को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गलवान के बाद रिश्तों में आया था बड़ा बदलाव

जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों पर गहरा असर पड़ा था। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिकों और सैन्य संसाधनों की तैनाती की थी। इसके बाद सैन्य कमांडरों और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। इन प्रयासों के चलते कुछ इलाकों में सैनिकों की तैनाती कम करने और पेट्रोलिंग से जुड़े मामलों में प्रगति हुई, लेकिन सीमा विवाद से जुड़े कई मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं।

LAC पर शांति बहाली होगी सबसे अहम मुद्दा

मोदी-जिनपिंग वार्ता में सीमा पर तनाव कम करने और LAC के आसपास स्थायी शांति एवं स्थिरता स्थापित करने पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है। पेट्रोलिंग व्यवस्था, बफर जोन, सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं। भारत के लिए सीमा पर शांति को आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों में आगे बढ़ने की महत्वपूर्ण शर्त माना जाता है। ऐसे में इस बैठक से दोनों देशों के बीच संवाद को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर भी होगी चर्चा

सीमा विवाद के साथ-साथ भारत और चीन के आर्थिक संबंध भी बैठक का अहम विषय हो सकते हैं। गलवान संघर्ष के बाद भारत ने चीनी ऐप्स पर कार्रवाई, निवेश की कड़ी निगरानी और वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव जैसे कई कदम उठाए थे। अब दोनों देशों के बीच व्यापार, वैश्विक सप्लाई चेन, दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता, रणनीतिक वस्तुओं की आपूर्ति और व्यापार घाटे जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है। दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण एजेंडा हो सकता है।

BRICS मंच पर बदले समीकरणों के बीच होगी मुलाकात

इस मुलाकात का महत्व केवल भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं है। BRICS सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख वैश्विक नेता मौजूद रहेंगे। ऐसे में मोदी और जिनपिंग की बातचीत बदलती वैश्विक राजनीति, बहुध्रुवीय व्यवस्था और एशिया में शक्ति संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो इससे सीमा पर तनाव कम करने के साथ व्यापार और अन्य द्विपक्षीय क्षेत्रों में सहयोग के रास्ते भी खुल सकते हैं।
 


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