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युद्ध की आग का असर: छत्तीसगढ़ का 20 हजार करोड़ का निर्यात संकट में, खाड़ी देशों को शिपमेंट ठप...

युद्ध की आग का असर: छत्तीसगढ़ का 20 हजार करोड़ का निर्यात संकट में, खाड़ी देशों को शिपमेंट ठप...

रायपुर: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब छत्तीसगढ़ के निर्यात कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। राज्य से होने वाला लगभग 20 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक निर्यात गंभीर संकट में आ गया है। खासतौर पर खाड़ी देशों को जाने वाले समुद्री शिपमेंट पूरी तरह ठप पड़ गए हैं, जिससे व्यापारियों और राइस मिलर्स की चिंता बढ़ गई है। फरवरी 2026 के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ यह संकट अप्रैल के पहले सप्ताह तक और गहराता नजर आ रहा है। प्रीमियम क्वालिटी का चावल, जो दुबई और अमेरिका जैसे देशों में बड़ी मात्रा में भेजा जाता था, अब बंदरगाहों और राइस मिलों में ही अटका हुआ है।

रूट ब्लॉक होने से बढ़ी परेशानी

मध्यपूर्व के खाड़ी देशों की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग फिलहाल बाधित हैं। इसका सीधा असर छत्तीसगढ़ के निर्यात पर पड़ा है, क्योंकि राज्य का बड़ा हिस्सा इन्हीं बाजारों पर निर्भर है। अफ्रीका से थोड़ी राहत है, हालांकि अफ्रीकी देशों को होने वाले चावल निर्यात पर अभी सीधा असर नहीं पड़ा है, जिससे व्यापारियों को कुछ हद तक राहत जरूर मिली है।

मिलर्स और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

राइस मिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाला महंगा चावल, जो खासतौर पर दुबई और अमेरिका भेजा जाता था, उसका व्यापार लगभग पूरी तरह रुक गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक स्थिति सुधरने की उम्मीद कम है।

छत्तीसगढ़ के निर्यात का पूरा गणित

राज्य के कुल निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा चावल का है। आंकड़ों के अनुसार 31%  उसना (Parboiled) चावल, 5% अन्य प्रकार का पैराबाइल्ड चावल, 16% एल्युमिनियम इंगोट, 7% ब्रोकन राइस (कनकी), 3% आयरन-स्टील, 4% अन्य धातुएं, 2% फेरो मैग्नीज, 2% माइल्ड स्टील, 3%  आयरन ओर प्लेट्स इन देशों में होता है सबसे ज्यादा निर्यात छत्तीसगढ़ से दुनिया के कई देशों में निर्यात होता है। प्रमुख देशों में इटली (7.79%), बेनिन, चीन, सेनेगल, टोगो, कोट डी’आइवोरे, तुर्किए, यूएई, कोरिया और लाइबेरिया शामिल हैं।

घटता-बढ़ता निर्यात आंकड़ा

2021-22: 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक
2024-25: 18,527 करोड़ रुपए
पिछला वित्तीय वर्ष: लगभग 19 हजार करोड़ रुपए
मौजूदा युद्ध जैसे हालात ने इस व्यापार को और अनिश्चितता में डाल दिया है।

भविष्य की स्थिति क्या होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव खत्म नहीं होता, तब तक निर्यात पूरी तरह सामान्य होना मुश्किल है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो छत्तीसगढ़ के उद्योग और किसानों दोनों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।


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