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अरुण साव का बड़ा फैसला: अब PWD के सारे काम होंगे ऑनलाइन, DPR से मंजूरी तक एक ही सिस्टम

अरुण साव का बड़ा फैसला: अब PWD के सारे काम होंगे ऑनलाइन, DPR से मंजूरी तक एक ही सिस्टम

रायपुर: छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई बड़े बदलावों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभागीय प्रक्रियाओं को आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए जल्द ही ‘वमिस’ (WMIS) लागू किया जाएगा। इसके लागू होने के बाद डीपीआर तैयार करने से लेकर कार्यों की स्वीकृति तक की प्रक्रिया ऑनलाइन और एकीकृत सिस्टम के जरिए संचालित होगी।

अरुण साव ने कहा कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से विभागीय कामकाज में लगने वाला समय कम होगा और स्वीकृत निर्माण परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने में मदद मिलेगी।

DPR से मंजूरी तक ऑनलाइन होगी प्रक्रिया

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि WMIS के जरिए लोक निर्माण विभाग की कई प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें DPR तैयार करने, कार्यों की स्वीकृति और अन्य विभागीय प्रक्रियाएं शामिल होंगी।

तकनीक के इस्तेमाल से न केवल फाइलों की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता पर भी बेहतर नजर रखी जा सकेगी। इससे विभागीय कामकाज में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

ढाई साल में 12,666 करोड़ के 1,572 कार्यों को मंजूरी

अरुण साव ने बताया कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद से लोक निर्माण विभाग को निर्माण कार्यों के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक स्वीकृतियां मिली हैं। पिछले ढाई वर्षों में 12,666 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 1,572 कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।

इन स्वीकृत परियोजनाओं में:

1,285 सड़क निर्माण कार्य
247 पुल निर्माण कार्य
42 भवन निर्माण कार्य

शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सड़क, पुल और भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ विभागीय प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

7 नए संभाग और 12 उप संभागीय कार्यालय शुरू

विभागीय कामकाज को मजबूत करने के लिए पिछले ढाई वर्षों में 7 नए संभागीय कार्यालय और 12 नए उप संभागीय कार्यालय शुरू किए गए हैं। सरकार का मानना है कि नए कार्यालयों से निर्माण कार्यों की निगरानी और स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

अरुण साव ने कहा कि लंबित अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का निराकरण भी विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने ‘लोक निर्माण से छत्तीसगढ़ निर्माण’ के लक्ष्य के साथ प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की बात कही।

रायपुर में ट्रैफिक कम करने के लिए नई सड़कों और फ्लाईओवर का प्लान

राजधानी रायपुर में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए लोक निर्माण विभाग कई नई सड़क और फ्लाईओवर परियोजनाओं पर काम कर रहा है।

योजनाओं के मुताबिक:

मोवा से झेरीखेड़ी: करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

लाभांडी से सड्डू: करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए भी 100 करोड़ रुपये की लागत से योजना तैयार की गई है।

इसके अलावा चंदनीडीह से रायपुरा तक बायपास रोड बनाने की योजना है। रावांभाटा-बंजारी मंदिर के पास फ्लाईओवर की योजना भी तैयार की गई है। वहीं NH-30 पर कमल विहार गेट के पास फ्लाईओवर निर्माण को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राजधानी में यातायात के दबाव को कम करना और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना है।

प्रमुख सड़कों के लिए 5 साल की मरम्मत योजना

लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़कों के बेहतर रखरखाव के लिए OPRMC के तहत प्रमुख मार्गों को 5 वर्षीय मरम्मत योजना में शामिल किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सिमगा-तिल्दा-खोरा मार्ग और नयापारा-कुरूद मार्ग को 5 साल की मरम्मत योजना के तहत लिया गया है। नयापारा-कुरूद मार्ग की लंबाई करीब 103 किलोमीटर बताई गई है और इसके रखरखाव का काम प्रगति पर है।

चालू वित्तीय वर्ष में भी महत्वपूर्ण सड़कों को OPRMC के तहत 5 साल के रखरखाव के लिए शामिल करने की योजना है।

सड़क निर्माण की गुणवत्ता की होगी थर्ड पार्टी जांच

लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने बताया कि सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड पार्टी जांच की व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के माध्यम से सड़कों की गुणवत्ता की जांच कराने की योजना है।

इस व्यवस्था से निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता का स्वतंत्र मूल्यांकन हो सकेगा। विभाग का फोकस अब निर्माण की गति के साथ-साथ सड़क की गुणवत्ता और लंबे समय तक टिकाऊपन पर भी है।

तकनीक और निगरानी से PWD में आएगा बदलाव

लोक निर्माण विभाग में WMIS लागू होने और निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच जैसी योजनाओं से विभागीय प्रक्रियाओं में बदलाव की उम्मीद है। सरकार का जोर डिजिटल सिस्टम के जरिए कामकाज को तेज और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ निर्माण परियोजनाओं की बेहतर निगरानी पर है।


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