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CHO की प्रोत्साहन राशि पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़ में प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

CHO की प्रोत्साहन राशि पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़ में प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात सीएचओ को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य पूरे करने के बदले मिलने वाली राशि में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अब प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के राज्य कार्यालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) से मामले की जांच कर रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल यह मामला अनियमितता की आशंका और शिकायतों के आधार पर जांच के दायरे में है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रोत्साहन राशि के भुगतान में कहां और कितनी गड़बड़ी हुई है।

CHO को मानदेय के अलावा मिलता है प्रोत्साहन भत्ता

प्रदेश के विभिन्न आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी जिम्मेदारियों में गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग, कैंसर, टीबी और कुष्ठ रोग की पहचान के लिए जांच संबंधी गतिविधियां तथा गर्भवती महिलाओं की देखभाल समेत कुल 12 तरह के कार्य शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीएचओ को करीब 16,500 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। इसके अतिरिक्त कामकाज और निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर उन्हें 5,000 से 15,000 रुपये तक प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि मिलने का प्रावधान बताया गया है। इसी भुगतान व्यवस्था में कथित गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू की है।

अनुपस्थिति और ऑनलाइन कार्यों को लेकर शिकायतें

शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ सीएचओ मुख्यालय में नियमित रूप से निवास नहीं करते, समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचते और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने सहित विभागीय डिजिटल प्रक्रियाओं का पालन भी संतोषजनक ढंग से नहीं करते। इसके बावजूद संबंधित कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। विभागीय स्तर पर अब यह जांचने की जरूरत है कि भुगतान निर्धारित नियमों, वास्तविक कार्य निष्पादन और पात्रता के अनुरूप किया गया या नहीं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर संचालक ने सभी जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को मामले की जांच करने, अनियमितता या लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने और जांच प्रतिवेदन राज्य कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।

लक्ष्य पूरा दिखाकर अधिक प्रोत्साहन लेने की आशंका

विभागीय सूत्रों के हवाले से यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ मामलों में स्वास्थ्य योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों और प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों के आधार पर प्रोत्साहन राशि के भुगतान में गड़बड़ी हो सकती है। सीएचओ जिला और विकासखंड स्तर के कार्यक्रम प्रबंधकों के समन्वय में विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करते हैं। ऐसे में जांच के दौरान वास्तविक कार्यों, दर्ज किए गए आंकड़ों, ऑनलाइन रिकॉर्ड और भुगतान की पात्रता का मिलान महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, लक्ष्य संबंधी आंकड़ों में हेरफेर या गलत भुगतान की पुष्टि अभी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

बेमेतरा से सामने आया था मामला

जानकारी के अनुसार, बेमेतरा जिले में पहले कुछ सीएचओ द्वारा कथित तौर पर गलत तरीके से प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की शिकायतें सामने आई थीं। उस समय कुछ कर्मचारियों का वेतन रोकने जैसी कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई थी। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन के बीच मामला चर्चा में रहा। अब राज्य स्तर पर जांच के निर्देश जारी होने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि शिकायतें किन जिलों में सही पाई जाती हैं और भुगतान प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

प्रदेशभर की जांच से सामने आएगी भुगतान व्यवस्था की वास्तविक स्थिति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्देशों के बाद सभी जिलों में प्रोत्साहन राशि के भुगतान, कार्य निष्पादन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच अहम मानी जा रही है। इस प्रक्रिया से पात्र कर्मचारियों को भुगतान सुनिश्चित करने और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी पहचान करने में मदद मिल सकती है। महत्वपूर्ण बात: फिलहाल करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई गई है, लेकिन कथित गड़बड़ी की वास्तविक राशि और जिम्मेदार लोगों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।


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