आगामी जनगणना में जातिगत जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति संबंधी आंकड़े एकत्र करने के प्रस्तावित तरीके की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
दोनों नेताओं का कहना है कि जातिगत जनगणना के आंकड़े देश में सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए डेटा संग्रह की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे आंकड़ों में किसी तरह की अस्पष्टता या गड़बड़ी की गुंजाइश कम से कम रहे।
‘ओपन-एंडेड’ सवालों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने जाति की जानकारी जुटाने के लिए प्रस्तावित ‘ओपन-एंडेड’ फॉर्मेट को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यदि लोगों को जाति का नाम खुद लिखने की स्वतंत्रता दी जाती है तो अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले नामों के कारण डेटा में काफी अंतर आ सकता है। एक ही जाति या समुदाय के लिए अलग-अलग नाम, उपजातियां और स्पेलिंग इस्तेमाल होने की वजह से समान समुदाय के लोग अलग-अलग कैटेगरी में दर्ज हो सकते हैं। कांग्रेस का तर्क है कि इससे अंतिम आंकड़ों में जातियों का अनावश्यक बिखराव पैदा होने की आशंका है।
गलत आंकड़ों से नीति निर्माण पर असर की आशंका
खड़गे और राहुल गांधी ने अपने पत्र में जातिगत आंकड़ों की शुद्धता को सामाजिक न्याय की योजनाओं से जोड़ते हुए कहा है कि गलत या अधूरे आंकड़े भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। जातियों की आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस का कहना है कि जनगणना में दर्ज जानकारी का मानकीकृत और विश्वसनीय होना बेहद जरूरी है।
कांग्रेस ने सुझाई ‘Fixed Caste List’
कांग्रेस नेताओं ने सरकार को एक वैकल्पिक तरीका अपनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि जातिगत विवरण दर्ज करने के लिए Fixed Caste List यानी निश्चित जाति सूची तैयार की जा सकती है। इस व्यवस्था में लोगों को पहले से तय सूची में से अपनी जाति चुनने का विकल्प दिया जा सकता है। डिजिटल जनगणना प्रक्रिया में इसे ड्रॉपडाउन मेन्यू के जरिए लागू किया जा सकता है। कांग्रेस का दावा है कि इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम या स्पेलिंग के कारण बनने वाली अलग-अलग प्रविष्टियों को कम किया जा सकेगा।
सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक डेटा का इस्तेमाल करने की मांग
खड़गे और राहुल गांधी ने सुझाव दिया है कि जातियों की मानकीकृत सूची तैयार करते समय उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक डेटाबेस को आधार बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित मौजूदा सूचनाओं तथा Anthropological Survey of India के पास उपलब्ध डेटा को भी उपयोगी स्रोत बताया है।
बिहार और तेलंगाना सर्वे का उदाहरण
अपने पत्र में कांग्रेस नेताओं ने बिहार जाति सर्वेक्षण-2022 और तेलंगाना जाति सर्वेक्षण-2024 का उदाहरण भी दिया है। उनका कहना है कि इन सर्वेक्षणों में निश्चित जाति सूचियों का इस्तेमाल किया गया था। खड़गे और राहुल गांधी ने दोनों राज्यों में इस्तेमाल की गई जाति सूचियों की प्रतियां भी प्रधानमंत्री को भेजी हैं। इसके जरिए कांग्रेस ने केंद्र के सामने एक मानकीकृत मॉडल का विकल्प रखने की कोशिश की है।
‘पिछड़े वर्ग’ के उल्लेख को लेकर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने प्रस्तावित प्रश्नावली में ‘पिछड़े वर्ग’ (Backward Class) शब्द के स्पष्ट उल्लेख नहीं होने पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि जातिगत विवरण के साथ सामाजिक श्रेणियों का उचित वर्गीकरण जरूरी है, क्योंकि इसी आधार पर भविष्य में सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण और नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं।