BJP News: मध्य प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक की सियासत में भूमि आवंटन और राजनैतिक रसूख को लेकर एक संग्राम छिड़ गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और कांग्रेस नेता मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के दशकों पुराने निवेशों को लेकर सवाल दाग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके मंत्री बेटे कर्नाटक में एक बड़े जमीन घोटाले के चक्रव्यूह में घिर गए हैं। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने खड़गे परिवार द्वारा किए गए Act of Corruption का खुलासा किया है।
रेवड़ी की तरह बांटी जमीन
बीजेपी का आरोप है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर बेंगलुरु के सबसे वीआईपी इलाके में सरकारी जमीन मल्लिकार्जुन खड़गे के प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को आवंटित कर दी। ध्यान देने वाली विधिक बात यह है कि यह जमीन ट्रस्ट ने सरकार से खरीदी नहीं है, बल्कि सरकार ने सीधे आवंटित की है।
दो नियमों का खुला उल्लंघन
इस बेशकीमती जमीन की बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। भंडारी ने सवाल दागा कि कर्नाटक सरकार ने दो नियमों का उल्लंघन करके यह आवंटन क्यों किया? इस प्राइवेट लिमिटेड ट्रस्ट ने अब तक लोकहित का ऐसा कौन सा ऐतिहासिक काम किया है जो इसे इतनी महंगी सरकारी जमीन सौंप दी गई?
रिसर्च के नाम पर 90 एकड़ जमीन
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप यहीं खत्म नहीं हुए। बीजेपी प्रवक्ता ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए एक और बड़ा खुलासा किया है कि खड़गे परिवार के इसी प्राइवेट लिमिटेड सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को गुलबर्ग में 90 एकड़ सरकारी जमीन पानी के रिसर्च के नाम पर दे दी गई है। भाजपा का सीधा दावा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और उनके बेटे प्रियंक खड़गे ने अपने राजनैतिक रसूख और पद का दुरुपयोग कर इन सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाया है।
कांग्रेस का दोगलापन
भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि कर्नाटक के इस महा-घोटाले से ध्यान भटकाने के लिए कांग्रेस का प्रदेश संगठन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ भ्रामक आंकड़ों की खेती कर रहा है। मुख्यमंत्री के मामले की सच्चाई पूरी तरह साफ है। कांग्रेस जिन जमीनों को मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदने का दुष्प्रचार कर रही है, वे तमाम जमीनें डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा चुनाव लड़ने से बहुत पहले ही अपनी कमाई से खरीद ली थीं। विपक्ष जिस कंपनी का डायरेक्टर बताकर सीएम को घेरने का ढोंग कर रहा है, डॉ. मोहन यादव उस कंपनी के डायरेक्टर का पद साल 2017 में ही छोड़ चुके हैं।
युवावस्था का व्यापार
डॉ. मोहन यादव अपनी युवावस्था से ही जमीनों में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, क्योंकि राजनीति के कारण वे कोई व्यवसाय नहीं कर सकते। अब उनके दशकों पुराने निजी निवेश को उनके चचेरे भाइयों के वर्तमान रियल एस्टेट बिजनेस से जबरन कनेक्ट कर केवल हल्ला मचाने की साजिश रची जा रही है।