जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व की प्रमुख परंपरा रथ निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत लगभग 30 फीट ऊंचे विशाल रथ का निर्माण किया जाएगा। इस रथ को तैयार करने में स्थानीय आदिवासी समुदाय के पारंपरिक कारीगरों की अहम भूमिका रहती है। निर्धारित परंपरा के अनुसार, रथ निर्माण का काम लगभग 15 दिनों में पूरा किया जाता है। बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं, जनजातीय संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में रथ परिक्रमा सबसे प्रमुख आकर्षणों में से एक है। विजयादशमी के अवसर पर इसी विशाल रथ पर मां दंतेश्वरी के छत्र और डोली को विराजमान कर जगदलपुर शहर में परिक्रमा कराई जाती है।
30 फीट ऊंचे रथ को खींचने में जुटते हैं सैकड़ों आदिवासी
बस्तर दशहरा के दौरान विशाल रथ की परिक्रमा देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। लगभग 30 फीट ऊंचे इस रथ को खींचने के लिए 400 से अधिक आदिवासियों की भागीदारी की आवश्यकता होती है। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि बस्तर की सामूहिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का भी परिचायक है। रथ परिक्रमा के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्थानीय समुदाय के लोग पीढ़ियों से चली आ रही इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए पर्व की परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।
सरई की लकड़ियों से बनता है विशाल रथ
बस्तर दशहरा के रथ निर्माण की प्रक्रिया अपने आप में बेहद खास है। परंपरा के अनुसार, रथ बनाने के लिए सरई की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। इन लकड़ियों को लाने से लेकर उनकी पूजा-अर्चना और रथ निर्माण तक के कार्य पारंपरिक व्यवस्थाओं के तहत किए जाते हैं। रथ निर्माण में स्थानीय गांवों के निर्धारित समुदायों की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। लकड़ियों को जुटाने और उन्हें रथ के आकार में तैयार करने की प्रक्रिया में पारंपरिक ज्ञान और कारीगरी का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। यही विशेषताएं बस्तर दशहरा को देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग पहचान देती हैं।
बड़ेउमर और झाड़उमर के ग्रामीण निभाते हैं खास जिम्मेदारी
बस्तर जिले के बड़ेउमर और झाड़उमर गांवों के आदिवासी ग्रामीण रथ निर्माण की इस ऐतिहासिक परंपरा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परंपरा के मुताबिक, इन गांवों के ग्रामीण कारीगर लगभग 15 दिनों तक मेहनत करके विशाल रथ तैयार करते हैं। रथ निर्माण के लिए 100 से अधिक ग्रामीण कारीगर स्थानीय सीरासार भवन में ठहरकर काम पूरा करते हैं। सीमित समय में इतने बड़े रथ को तैयार करना उनके अनुभव, मेहनत और पारंपरिक हुनर का उदाहरण है।
विजयादशमी पर निकलेगी मां दंतेश्वरी के रथ की परिक्रमा
बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल रथ परिक्रमा विजयादशमी के दिन निकाली जाती है। इस दौरान बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के छत्र और डोली को रथ पर विराजमान कर शहर में परिक्रमा कराई जाती है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। करीब छह शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा बस्तर की जनजातीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामुदायिक सहयोग की जीवंत मिसाल है। रथ निर्माण की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में दशहरा पर्व को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है।