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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच WHO की बड़ी चेतावनी: ‘न्यूक्लियर इंसिडेंट’ का खतरा, वैश्विक तबाही की आशंका...

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच WHO की बड़ी चेतावनी: ‘न्यूक्लियर इंसिडेंट’ का खतरा, वैश्विक तबाही की आशंका...

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच World Health Organization (WHO) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन ने आशंका जताई है कि मौजूदा हालात में किसी भी समय “न्यूक्लियर इंसिडेंट” हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर लंबे समय तक पड़ सकता है। WHO के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र (EMRO) की निदेशक Hanan Balkhy ने कहा है कि संगठन संभावित परमाणु संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी तरह की चूक भारी पड़ सकती है।

न्यूक्लियर खतरे को लेकर अलर्ट:

एक रिपोर्ट के अनुसार, WHO इस समय रेडिएशन (विकिरण) से जुड़े जोखिमों, बड़े पैमाने पर जनहानि और पर्यावरणीय नुकसान से निपटने के लिए अपने प्रोटोकॉल की समीक्षा कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अगर न्यूक्लियर घटना होती है, तो उसका असर केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दशकों तक पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। बाल्खी ने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर परमाणु घटना होती है, तो उसके परिणाम लंबे समय तक रहेंगे और इसका असर वैश्विक स्तर पर तबाही मचा सकता है।”

ईरान-इजरायल-यूएस तनाव बना वजह:

मिडिल ईस्ट में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को इस खतरे की बड़ी वजह माना जा रहा है। हाल के दिनों में ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिससे “रेडियोलॉजिकल घटना” की संभावना भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही सीधे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल न हो, लेकिन ऐसे हमलों से रेडिएशन लीक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

अमेरिका की रणनीति में बदलाव:

इस बीच Robert Kadlec, जो अमेरिका के न्यूक्लियर डिटरेंस और केमिकल-बायोलॉजिकल डिफेंस के असिस्टेंट सेक्रेटरी हैं, ने कहा कि अमेरिका की रक्षा रणनीति अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस समय एक साथ दो परमाणु शक्तियों से निपटने की चुनौती का सामना कर रहा है। रक्षा अधिकारियों ने China और Russia से बढ़ते न्यूक्लियर और मिसाइल खतरों को लेकर भी चिंता जताई है। कैडलेक ने थिएटर-रेंज न्यूक्लियर विकल्पों की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि ये आधुनिक युद्ध रणनीति का जरूरी हिस्सा बन चुके हैं।

क्या हो सकता है असर?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। WHO की चेतावनी साफ संकेत देती है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को एक बड़े न्यूक्लियर संकट का सामना करना पड़ सकता है। बल्कि  बड़े पैमाने पर जनहानि, दशकों तक पर्यावरण प्रदूषण, वैश्विक स्वास्थ्य संकट के साथ ही कई देशों में रेडिएशन फैलने का भी खतरा हैं। 

 


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