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Badnawar Water Crisis: बदनावर में पानी की किल्लत, पानी के लिए तरस रही जनता

Badnawar Water Crisis: बदनावर में पानी की किल्लत, पानी के लिए तरस रही जनता

Badnawar Water Crisis: मध्यप्रदेश में विकास और नल-जल योजना के दावों के बीच धार जिले की बदनावर विधानसभा क्षेत्र की दो सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कानवन और बिड़वाल से डराने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। 40 डिग्री से अधिक की झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में यहां की आम जनता को पानी की एक-एक बूंद के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

शो-पीस बनीं करोड़ों की टंकियां

बदनावर क्षेत्र की पंचायत कानवन में पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। हमारी ग्राउंड जीरो टीम ने जब मौके का मुआयना किया, तो पानी के बर्तनों के साथ महिलाएं लामबंद होती और सिस्टम को कोसती नजर आईं। कानवन की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। ग्राम पंचायत द्वारा करीब 6 वर्ष पहले लाखों की लागत से एक पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज तक इस टंकी से गांव के एक भी घर में पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है।

PHED की टंकी भी नाकाम

इसी तरह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) द्वारा बनाई गई दूसरी पानी की टंकी भी तकनीकी कमियों और देखरेख के अभाव में सिर्फ एक 'शो-पीस' बनकर खड़ी है। करोड़ों के ये दोनों सरकारी प्रोजेक्ट धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए हैं।

सरपंच और पूर्व सचिव की मनमानी का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वर्तमान सरपंच सरजूबाई और पूर्व सचिव योगेंद्र सिंह राठौर की आपसी जुगलबंदी और मनमाने रवैये के कारण गांव की पूरी वाटर सप्लाई चैन ध्वस्त हो चुकी है। पंचायत में कई बार लिखित शिकायत देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।

जल त्रासदी की दहलीज पर कानवन!

पानी न मिलने के कारण कानवन के ग्रामीण अब खेतों के कुओं और दूषित स्रोतों से बेहद गंदा और मटमैला पानी लाकर पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन को बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि बीते दिनों इंदौर में गंदा पानी पीने के कारण ४० से अधिक लोगों की मौत का जो भयावह मंजर देखा गया था, लापरवाही का यही आलम रहा तो वैसी ही जानलेवा बीमारी और त्रासदी कानवन में भी पैर पसार सकती है।

15 दिनों में सिर्फ एक बार सप्लाई

बदनावर क्षेत्र की ही दूसरी बड़ी पंचायत बिड़वाल की कहानी भी कुछ अलग नहीं है। हालांकि यहां पानी के भंडारण के लिए 3-3 टंकियां मौजूद हैं, लेकिन वितरण का मैनेजमेंट पूरी तरह लाचार है। बिड़वाल में ग्रामीणों को 15 दिनों में महज एक बार नल का पानी नसीब हो रहा है। इतना ही नही पंचायत प्रशासन की संवेदनहीनता देखिए कि ये नल भी देर रात या आधी रात के वक्त खोले जाते हैं। इसके चलते कामधंधा करके सोए हुए कई गरीब और मजदूर परिवार पानी भरने से वंचित रह जाते हैं। इस गंभीर अव्यवस्था की ओर बिड़वाल पंचायत के सरपंच और सचिव आंखें मूंदे बैठे हैं।

सरकार से जनता की गुहार

क्षेत्र की जनता ने अब सूबे की मोहन यादव सरकार और धार जिला कलेक्टर से सामूहिक गुहार लगाई है कि दोनों पंचायतों में चल रही इस मनमानी और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और तत्काल प्रभाव से टैंकरों या अन्य वैकल्पिक माध्यमों से सुचारू पेयजल व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि जनता को इस भीषण तपन में राहत मिल सके।


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