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तेलीबांधा तालाब में घूमना पड़ेगा महंगा, मरीन ड्राइव पर अब देना होगा पार्किंग चार्ज

तेलीबांधा तालाब में घूमना पड़ेगा महंगा, मरीन ड्राइव पर अब देना होगा पार्किंग चार्ज

मोहम्मद हसन//रायपुर: रायपुर का प्रसिद्ध तेलीबांधा तालाब, जो अब तक शहरवासियों के लिए एक सुकून भरी और मुफ़्त पारिवारिक सैरगाह के रूप में जाना जाता था, अब लोगों के लिए महंगा साबित होने जा रहा है। नगर निगम रायपुर ने तालाब परिसर और मरीन ड्राइव क्षेत्र में पार्किंग शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसके तहत अब यहां वाहन खड़ा करने के लिए लोगों को शुल्क चुकाना होगा।

दोपहर 12 बजे के बाद लागू होगा पार्किंग शुल्क

नगर निगम के फैसले के अनुसार, सुबह से दोपहर 12 बजे तक पार्किंग पूरी तरह फ्री रहेगी। मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाले लोगों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि दोपहर 12 बजे के बाद वाहन पार्क करने पर शुल्क देना अनिवार्य होगा।

पार्किंग शुल्क की दरें तय

नए नियमों के तहत मरीन ड्राइव क्षेत्र में पार्किंग शुल्क इस प्रकार निर्धारित किया गया है— चार पहिया वाहन के लिए 4 घंटे तक ₹20, जबकि दो पहिया वाहन के लिए 12 घंटे तक ₹10 शुल्क लिया जाएगा। नगर निगम का कहना है कि यह शुल्क यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया जा रहा है।

शुल्क लेंगे, लेकिन जिम्मेदारी नहीं

इस फैसले का सबसे विवादित पहलू यह है कि पार्किंग शुल्क वसूलने के बावजूद वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर निगम नहीं लेगा। यानी यदि पार्किंग स्थल पर वाहन चोरी होता है या किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो इसकी जवाबदेही निगम की नहीं होगी। इस बात को लेकर आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

महापौर का तर्क: ट्रैफिक सुधार के लिए फैसला

रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने कहा कि मरीन ड्राइव पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और वाहन अव्यवस्थित तरीके से खड़े किए जाते हैं, जिससे अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। यातायात को सुगम और व्यवस्थित करने के लिए पार्किंग शुल्क का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मॉर्निंग वॉक करने वालों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और चार्ज दोपहर 12 बजे के बाद ही लागू होगा।

कांग्रेस का हमला: निगम सिर्फ राजस्व वसूली कर रहा

इस फैसले को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। PCC चीफ दीपक बैज ने नगर निगम पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला ट्रैफिक सुधार के नाम पर सीधे-सीधे राजस्व वसूली का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि रायपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य नगर निगमों के पास भी बजट की कमी है, इसलिए जनता से पैसा वसूला जा रहा है।

जनता के मन में सवाल

एक ओर नगर निगम ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है, तो वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्यों नहीं? साथ ही यह भी चिंता जताई जा रही है कि क्या अब रायपुर में परिवार के साथ घूमना भी आम आदमी के लिए धीरे-धीरे महंगा होता जाएगा।

 


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