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Trump Tariff Threat: ईरान वार्ता फेल, चीन पर ट्रंप का ‘टैरिफ टेरर’ हमला, वैश्विक ट्रेड वॉर की आशंका तेज...

Trump Tariff Threat: ईरान वार्ता फेल, चीन पर ट्रंप का ‘टैरिफ टेरर’ हमला, वैश्विक ट्रेड वॉर की आशंका तेज...

इस्लामाबाद: Donald Trump ने एक बार फिर अपनी आक्रामक आर्थिक रणनीति का संकेत देते हुए ‘टैरिफ टेरर’ की शुरुआत कर दी है। Islamabad में अमेरिका और Iran के बीच करीब 21 घंटे चली हाई-लेवल शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद वैश्विक तनाव तेजी से बढ़ गया है।

वार्ता विफल, ट्रंप का ‘प्लान B’ एक्टिव

अमेरिका-ईरान बातचीत के असफल होते ही ट्रंप प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए China को सीधे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह ईरान को सैन्य या लॉजिस्टिक सपोर्ट देना जारी रखता है, तो उसे अमेरिकी बाजार में भारी टैरिफ झेलना होगा। ट्रंप का मानना है कि ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत के पीछे चीन और Russia जैसे देशों की भूमिका है।

‘टैरिफ टेरर’ से वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा

ट्रंप का नया टैरिफ प्लान उन देशों को निशाना बनाता है जो ईरान को हथियार या संसाधन मुहैया कराते हैं। ऐसे देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अमेरिका हाई टैरिफ लगाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम खासतौर पर चीन के लिए बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि ईरान के साथ उसके ऊर्जा और व्यापारिक संबंध मजबूत हैं। इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव

Strait of Hormuz को लेकर भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है, जिससे ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग किया जा सके।

ईरान-चीन-रूस गठजोड़ पर अमेरिकी नजर

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, चीन और रूस प्रत्यक्ष रूप से हथियार सप्लाई से बच रहे हैं, लेकिन अप्रत्यक्ष रास्तों से ईरान तक सैन्य सहायता पहुंचने की आशंका है। ट्रंप प्रशासन अब ‘सेकेंडरी सैंक्शन’ और टैरिफ के जरिए इस गठजोड़ को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।

बाजारों में घबराहट, ट्रेड वॉर का खतरा

इस घटनाक्रम के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। निवेशकों में चिंता है कि यह तनाव एक बड़े वैश्विक ट्रेड वॉर का रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा संतुलन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता ने अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक और सामरिक टकराव का नया मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप का ‘टैरिफ टेरर’ जहां चीन को सीधे चुनौती देता है, वहीं पूरी दुनिया को संभावित ट्रेड वॉर और ऊर्जा संकट की ओर धकेल सकता है। आने वाले दिन वैश्विक राजनीति और बाजारों के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।


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