मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz को खोलने के लिए दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम अब अंतिम चरण में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, क्या आज की रात ईरान के लिए “कयामत की रात” साबित हो सकती है? सूत्रों के मुताबिक, अगर ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।
किन ठिकानों पर हो सकता है हमला?
अमेरिका की संभावित रणनीति में ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की बात सामने आ रही है। इनमें पावर प्लांट और बिजली उत्पादन केंद्र, तेल रिफाइनरी और गैस नेटवर्क, प्रमुख पुल और हाईवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब, सैन्य ठिकाने और मिसाइल बेस शामिल हो सकते हैं।
ईरान का ऊर्जा नेटवर्क निशाने पर
ईरान की कुल बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 90 गीगावाट है, जिसमें गैस आधारित संयंत्रों का दबदबा है। प्रमुख पावर प्लांट, बुशहर न्यूक्लियर प्लांट (1000 MW)- रणनीतिक रूप से बेहद अहम, दमावंद पावर प्लांट-लगभग 2800+ MW क्षमता, शाहिद रजाई और शाहिद सलीमी प्लांट - बड़े थर्मल यूनिट्स, करुन-3 हाइड्रो प्रोजेक्ट- जलविद्युत का प्रमुख स्रोत शामिल है, इन ठिकानों पर हमला ईरान की ऊर्जा सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
पुल और इंफ्रास्ट्रक्चर भी खतरे में
हाल ही में अल्बोर्ज़ प्रांत के करज स्थित B1 ब्रिज पर हमले की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ईरान के ऐतिहासिक और रणनीतिक पुल जैसे इस्फ़हान के ऐतिहासिक ब्रिज, करुण नदी पर बने आर्च ब्रिज भी संभावित टारगेट हो सकते हैं, जिससे देश की कनेक्टिविटी प्रभावित होगी।
सैन्य ठिकाने और “मिसाइल सिटी” नेटवर्क
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसके गुप्त सैन्य नेटवर्क में है। प्रमुख सैन्य ठिकाने बंदर अब्बास नेवल बेस, हमदान एयरबेस, भूमिगत “मिसाइल सिटी” (कर्मानशाह, कोम, खुरासान) ये ठिकाने पहाड़ों और जमीन के अंदर बने हैं, जिससे इन्हें नष्ट करना आसान नहीं होगा।
वैश्विक असर: तेल, व्यापार और युद्ध का खतरा
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। अगर यहां संघर्ष बढ़ता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होगी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ेंगी, वैश्विक युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव अब निर्णायक मोड़ पर है। Donald Trump की चेतावनी के बाद आने वाले कुछ घंटे बेहद अहम हैं। अगर कूटनीति विफल होती है, तो यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।