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Panna News: सच्चे प्रेम की वैसाखी बनाम तंत्र की लापरवाही,:पन्ना कलेक्टर का बड़ा एक्शन

Panna News: सच्चे प्रेम की वैसाखी बनाम तंत्र की लापरवाही,:पन्ना कलेक्टर का बड़ा एक्शन

कादिर, पन्ना। जब सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता मर जाती है और योजनाएं केवल कागजों की फाइलों में दफन हो जाती हैं, तब एक गरीब को न्याय के लिए किस कदर जद्दोजहद करनी पड़ती है, इसकी जीती-जागती और रुला देने वाली तस्वीर पन्ना कलेक्टर कार्यालय में देखने को मिली।" यहाँ पन्ना जिले के गौरा गाँव का रहने वाला एक लाचार पति अपनी चलने-फिरने में पूरी दिव्यांग जीवनसंगिनी को अपनी पीठ पर लादकर विधिक न्याय की आस में कलेक्ट्रेट पहुंचा। महिला का आरोप है कि निचले स्तर के पंचायत कर्मियों की विधिक मनमानी के कारण वह पिछले 10 साल से राशन समेत हर एक मूलभूत सरकारी योजना के लाभ से वंचित है और भुखमरी की कगार पर खड़ी है।

राशन कार्ड में खेल

गौरा गांव की रहने वाली इस बेबस महिला के मुताबिक, वह शारीरिक रूप से पूर्णतः दिव्यांग है। पहले उसका नाम अति गरीबी रेखा सूची में शामिल था। लेकिन करीब 10 साल पहले पंचायत के सरपंच और सचिव ने विधिक नियमों को ताक पर रखकर उसका अति गरीबी का राशन कार्ड बदलकर सामान्य श्रेणी में डाल दिया। श्रेणी बदलने के बाद से लेकर आज तक महिला को खाद्य विभाग की पात्रता राशन पर्ची जारी नहीं की गई। पिछले दस वर्षों से यह परिवार राशन की दुकान से मिलने वाले एक-एक अनाज के दाने के लिए तरस रहा है। सरपंच-सचिव से लेकर भोपाल के वरिष्ठ विधिक दफ्तरों तक चक्कर काटने के बाद भी इस लाचार परिवार की फाइलें धूल फांकती रहीं।

एम्स में चल रहा इलाज

इस परिवार पर केवल गरीबी और दिव्यांगता की मार नहीं है, बल्कि नियति ने इन्हें आर्थिक संकट में धकेल दिया है। दिव्यांग महिला वर्तमान में किडनी की एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी से पीड़ित है। उसका इलाज भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चल रहा है, जिसके सफर और दवाओं के खर्च ने परिवार की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ दी है। दवाओं के भारी खर्च और घर में अनाज का दाना न होने के कारण उपजे भयंकर आर्थिक संकट की वजह से इस दंपत्ति के मासूम बच्चों की पढ़ाई-लिखाई तक पूरी तरह छूट चुकी है।

जब पति ही बन गया वैसाखी

जब हर विधिक दरवाजे से निराशा हाथ लगी, तो पति ने हार नहीं मानी। अपनी पत्नी की लाचारी को देखते हुए वह खुद उसकी वैसाखी बन गया। उसने अपनी पत्नी को अपनी पीठ पर कसकर बांधा और कलेक्ट्रेट की सीढ़ियां चढ़ते हुए सीधे जनसुनवाई कक्ष में जा पहुंचा। इस भावुक कर देने वाले नजारे को देखकर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद हर अधिकारी, कर्मचारी और राहगीर की आंखें नम हो गईं।

कलेक्टर परमार का एक्शन 

मामले की संवेदनशीलता और मानवाधिकार से जुड़ी कड़ियों को देखते हुए पन्ना कलेक्टर उषा परमार ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित खाद्य अधिकारियों और जनपद सीईओ को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर ने आपातकालीन विधिक शक्तियों का उपयोग करते हुए पीड़िता की तत्काल डिजिटल राशन पर्ची जारी करने और उसे मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री की सभी सामाजिक सुरक्षा व दिव्यांग पेंशन योजनाओं से तत्काल जोड़ने के कड़े विधिक आदेश जारी किए हैं।


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