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Tumhar Token App Closed: धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण पर, 29 तक धान बेच सकेंगे किसान...

Tumhar Token App Closed: धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण पर, 29 तक धान बेच सकेंगे किसान...

रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। राज्य में अब तक 20 लाख से अधिक किसानों से धान की खरीदी की जा चुकी है। शेष बचे किसानों के लिए समितियों द्वारा टोकन जारी कर दिए गए हैं, लेकिन अब तुंहर टोकन एप के माध्यम से टोकन जारी नहीं किए जा रहे हैं। जिन किसानों के पास अभी भी धान शेष है या जिनका धान आंशिक रूप से ही बिक पाया है, उन्हें अब सीधे समिति में आवेदन देना होगा। आवेदन के बाद पटवारी और तहसीलदार द्वारा भौतिक सत्यापन किए जाने पर ही नया टोकन जारी किया जाएगा।

10 जनवरी तक जारी हो चुके थे 31 जनवरी तक के टोकन:

सूत्रों के अनुसार, 10 जनवरी तक किसानों को 31 जनवरी तक के लिए टोकन जारी कर दिए गए थे। लेकिन शासन द्वारा नए नियम लागू किए जाने के बाद अब तुंहर एप को बंद कर दिया गया है। समितियों के प्रबंधकों का कहना है कि अब शासन की नई व्यवस्था के तहत ही टोकन जारी किए जा रहे हैं। कई ऐसे किसान हैं जिनके पास टोकन होने के बावजूद पूरा धान नहीं बिक पाया है। ऐसे मामलों में दोबारा टोकन की मांग की जा रही है, लेकिन भौतिक सत्यापन के बिना टोकन जारी नहीं किया जा रहा।

परिवहन व्यवस्था ठप:

धान उठाव के लिए उपयोग में आने वाला डिलीवरी एप बंद कर दिया गया है, जिससे समितियों में धान का परिवहन प्रभावित हो रहा है। समितियों में अब धान रखने की जगह नहीं बची है, जिससे समिति प्रबंधकों की परेशानी बढ़ गई है।डीएमओ द्वारा डीओ और आरओ जारी नहीं किए जाने के कारण धान का उठाव नहीं हो पा रहा। 

धान खरीदी की दैनिक लिमिट घटा:

प्रदेश की 2739 समितियों में से लगभग 1700 समितियों में बफर स्टॉक से अधिक धान जमा हो चुका है। इस स्थिति के चलते बेमेतरा, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, कवर्धा सहित कई जिलों में धान खरीदी की दैनिक लिमिट घटा दी गई है। समिति प्रबंधक लगातार कलेक्टर से उठाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

31 जनवरी के टोकन खरीदी अब 29 को:

जानकारी के अनुसार, जिन किसानों को 31 जनवरी के लिए टोकन जारी किया गया था, उनसे अब 29 जनवरी को ही धान खरीदी की जा रही है। वजह यह बताई जा रही है कि अंतिम दिन शनिवार होने के कारण खरीदी प्रभावित हो सकती है। किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए समितियों द्वारा उन्हें दो दिन पहले ही धान लाने की सूचना दी जा रही है।
 


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