होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

TMC के बैंक अकाउंट से पैसा निकाल सकेगी ममता बनर्जी, हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, लेकिन रखी यह शर्त

TMC के बैंक अकाउंट से पैसा निकाल सकेगी ममता बनर्जी, हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, लेकिन रखी यह शर्त

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बैंक खातों के संचालन को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने पार्टी को अपने दैनिक प्रशासनिक और संगठनात्मक खर्चों के लिए बैंक खाते संचालित करने की अनुमति दे दी है। हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि खातों का संचालन न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में ही किया जाएगा। हाल ही में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद टीएमसी के कुछ बैंक खातों पर रोक लगा दी गई थी, जिसके खिलाफ पार्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

पुलिस की कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि खातों को फ्रीज करने के लिए प्रस्तुत किए गए साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि जांच एजेंसी अब तक ऐसे ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सकी है, जिनके आधार पर इतनी सख्त कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके। कोर्ट ने फिलहाल खातों के संचालन की अनुमति देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि विशेष अधिकारी की निगरानी इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा रहेगी।

चुनाव आयोग के फैसले तक लागू रहेगी यह व्यवस्था

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जब तक चुनाव आयोग इस विवाद पर अंतिम फैसला नहीं देता, तब तक पार्टी का बागी गुट विशेष अधिकारी के माध्यम से बैंक खातों के संचालन या उससे जुड़े मामलों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा। इससे फिलहाल बैंक खातों के संचालन का अधिकार केवल न्यायालय की तय शर्तों के तहत ही रहेगा।

440 करोड़ रुपये के फंड की जांच जारी

यह पूरा विवाद टीएमसी से जुड़े कथित फंड मामले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करीब 440 करोड़ रुपये के लेनदेन वाले बैंक खातों की जांच कर रहा है। जांच के दौरान कई स्थानों पर छापेमारी भी की गई, जिनमें एक निजी एविएशन कंपनी का कार्यालय भी शामिल बताया गया। इसी मामले के तहत संबंधित बैंक खातों पर पहले डेबिट फ्रीज लगाया गया था।

चुनाव के बाद पार्टी में बढ़ा अंदरूनी विवाद

विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। पार्टी के कई सांसदों ने अलग रुख अपनाया, जिसके बाद संगठन दो गुटों में बंटा नजर आया। यह विवाद चुनाव आयोग तक पहुंच गया, जहां दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। अब इस मामले में चुनाव आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल पार्टी को सीमित राहत मिल गई है।


संबंधित समाचार