होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: अब घर आएगा BLO, ERO ऑफिस जाने की जरूरत नहीं

SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: अब घर आएगा BLO, ERO ऑफिस जाने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को कई अहम फैसले किए हैं। निर्वाचन सदन में हुई बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाने के साथ उन मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया आसान करने का फैसला किया गया, जिन्हें SIR के दौरान नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी के कारण नोटिस मिला है।

चुनाव आयोग के मुताबिक ऐसे मामलों में अब हर व्यक्ति को ERO या AERO कार्यालय जाकर व्यक्तिगत सुनवाई में शामिल होने की जरूरत नहीं होगी। BLO संबंधित मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकेंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इसके आधार पर ERO आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। व्यक्तिगत सुनवाई केवल विशेष मामलों में जरूरी होगी।

नोटिस पाने वालों के घर जाएगा BLO

SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम पुराने रिकॉर्ड से मैप नहीं हो पाए हैं या जिनके रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति सामने आई है, उनके लिए चुनाव आयोग ने प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब ऐसे मतदाताओं से जरूरी दस्तावेज लेने के लिए BLO घर पर जा सकेंगे। दस्तावेजों को ECINET पर अपलोड किए जाने के बाद ERO उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे।

गरीब और बेघर लोगों के लिए स्पेशल कैंप

चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी DEO को जरूरत के मुताबिक नाइट शेल्टर, मजदूर बस्तियों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि SIR या मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में ऐसे लोग पीछे न रह जाएं, जिनके पास स्थायी पता या जरूरी सुविधाओं तक आसान पहुंच नहीं है।

ECINET में भी किए गए बदलाव

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर ECINET पोर्टल और उससे जुड़े सिस्टम में कई अपग्रेड किए गए हैं। आयोग के अनुसार जरूरत के अनुसार फील्ड अधिकारियों को अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। आयोग ने यह भी तय किया है कि IT मॉड्यूल और पोर्टल से संबंधित नई योजनाओं को लागू करने से पहले अधिकारियों की कमेटी में उनकी समीक्षा की जाएगी।

दिल्ली में 30 अक्टूबर तक दाखिल कर सकेंगे दावे-आपत्तियां

दिल्ली के मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने SIR की समयसीमा में बदलाव किया है। दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख अब 30 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं इनके निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

महाराष्ट्र में भी बढ़ी डेडलाइन

महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। वहीं इनके निपटारे के लिए 10 नवंबर 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है।

SIR के बाद छूटा नाम तो कैसे जुड़ेगा?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों का नाम SIR के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं।

इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

गोवा में भी ऐसे मतदाताओं को लेकर घर-घर संपर्क की प्रक्रिया शुरू की गई है। आयोग के अनुसार 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने नाम जोड़ने के लिए Form 6 पहले ही भर दिया है।

बैठक के बीच CEC को लेकर सियासी विवाद

चुनाव आयोग की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। हाल में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताए जाने का दावा किया गया था।

रिपोर्ट में Form 6, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और वोटर डेटाबेस से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर कथित आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।

विपक्षी दलों ने इन रिपोर्टों के आधार पर CEC के इस्तीफे की मांग की है और आगे की राजनीतिक कार्रवाई की बात कही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि SIR से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आयोग की बैठक में SIR प्रक्रिया को लेकर कई प्रशासनिक और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की गई। खास तौर पर नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को आसान करने, कमजोर वर्गों तक पहुंच बढ़ाने और डिजिटल सिस्टम को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।

इससे SIR प्रक्रिया में उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान होगी जिन्हें रिकॉर्ड या मैपिंग से जुड़ी वजहों से नोटिस जारी किया गया है।


संबंधित समाचार