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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा दावा, बिहार समेत कई राज्यों के आदेश सर्वसम्मति से मंजूर

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा दावा, बिहार समेत कई राज्यों के आदेश सर्वसम्मति से मंजूर

नई दिल्ली। Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच आयोग की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, बिहार और असम समेत कई राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR से जुड़े आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बाद सर्वसम्मति से जारी किए गए।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर अलग-अलग राय सामने आई थी। चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के संदर्भ में कहा है कि किसी संस्थान में फैसले से पहले अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

बिहार समेत कई राज्यों के SIR आदेशों पर सहमति

आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बिहार के लिए जारी SIR आदेश के अलावा असम, 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों और 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अलग-अलग आदेशों को पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली थी। चुनाव आयोग का कहना है कि इन फैसलों में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त शामिल थे और सभी आदेश सर्वसम्मति से मंजूर किए गए।

नए मतदाताओं के लिए Declaration Form

SIR से जुड़े स्वीकृत आदेशों में नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया से संबंधित Declaration Form का प्रावधान भी शामिल है। इसे नए मतदाताओं के लिए Form-6 के साथ जमा करने की व्यवस्था बताई गई है।

आयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य कागजी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना है। यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत विशेष पुनरीक्षण से जुड़ी है।

रिपोर्ट में उठे थे आयोग के अंदर मतभेद के सवाल

दरअसल, हाल में सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में मतदाता सूची के प्रबंधन, Form-6 और चुनावी डेटा से जुड़े कई मामलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में 10 महीने की अवधि में कई अलग-अलग टिप्पणियों और आपत्तियों का उल्लेख किया गया था।

इसी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई। विपक्षी दलों ने भी इन रिपोर्टों के आधार पर आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने इन खबरों के जवाब में कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय लेने से पहले अलग-अलग विचार और सुझाव सामने आना सामान्य है। आयोग के मुताबिक, टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं और अधिकारियों को भी अपने सुझाव देने का अधिकार है।

आयोग ने यह भी कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को आधार बनाकर पूरी प्रक्रिया की तस्वीर नहीं देखी जा सकती। उसके अनुसार, पिछले एक साल में चुनावी सुधारों, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR समेत कई फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

SIR को लेकर जारी है बहस

SIR के मुद्दे पर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस लगातार जारी है। एक तरफ आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया को नियमों और कानून के अनुरूप बताते हुए फैसलों में सर्वसम्मति की बात कर रहा है, वहीं विपक्षी दल हालिया रिपोर्टों में सामने आए कथित आंतरिक मतभेदों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में बिहार समेत विभिन्न राज्यों में SIR से जुड़े आदेशों पर आयोग की ओर से दिया गया यह स्पष्टीकरण विवाद के बीच उसके आधिकारिक पक्ष को सामने रखता है।


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