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PM Modi का SCO मिशन: पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति से अहम वार्ता, जिनपिंग संग वन-टू-वन मीटिंग पर विराम

PM Modi का SCO मिशन: पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति से अहम वार्ता, जिनपिंग संग वन-टू-वन मीटिंग पर विराम

बिश्केक। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की कूटनीतिक गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर टिकी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ-साथ कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं। सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक को लेकर है, जिसमें भारत-रूस सहयोग के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी का किर्गिस्तान दौरा 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन के लिए है। इस सम्मेलन के साथ संगठन अपनी स्थापना के 25 वर्ष भी पूरे कर रहा है। भारत वर्ष 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और इस मंच पर सुरक्षा, संपर्क तथा आर्थिक अवसरों को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रखता है।

मोदी-पुतिन बैठक पर सबसे ज्यादा नजर

बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक तय है। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस अपने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। भारत और रूस के बीच रणनीतिक सहयोग कई दशकों पुराना है और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए आर्थिक तथा भू-राजनीतिक समन्वय का महत्व बढ़ गया है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं की बैठक SCO सम्मेलन के इतर निर्धारित है।

ईरान और यूक्रेन के हालात भी रह सकते हैं चर्चा में

SCO सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब पश्चिम एशिया और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं। ईरान से जुड़े हालात और यूक्रेन युद्ध का प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, व्यापारिक मार्गों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ रहा है। विश्लेषकों की नजर इस बात पर भी है कि SCO के मंच पर सदस्य देश क्षेत्रीय संघर्षों और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन पर किस तरह अपनी रणनीति साझा करते हैं। सम्मेलन में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संकटों पर व्यापक विचार-विमर्श की संभावना है।

शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की संभावना स्पष्ट नहीं

SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच किसी स्तर की बातचीत की संभावना को लेकर चर्चा बनी हुई है। हालांकि, ताजा रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की संभावना स्पष्ट नहीं है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों सहित कई द्विपक्षीय विषयों पर बातचीत का सिलसिला विभिन्न कूटनीतिक माध्यमों से जारी है। दोनों नेताओं की एक ही बहुपक्षीय मंच पर मौजूदगी को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। SCO समिट दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी की बैठक को लेकर अभी सस्पेंस  बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बिश्केक में कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक आज नहीं होगी।

जयशंकर और डोभाल के दौरों के बाद बढ़ा दौरे का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की हालिया कूटनीतिक सक्रियता के बाद हो रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर चीन के साथ हुई बातचीत के बाद बिश्केक में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत पिछले कुछ समय से रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संपर्क और संवाद को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच भारत को सुरक्षा, संपर्क, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखने का अवसर देते हैं।

उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद बिश्केक पहुंचे पीएम मोदी

किर्गिस्तान पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान का दौरा किया। भारत सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा, शिक्षा तथा जनसंपर्क के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना था। उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री बिश्केक पहुंचे, जहां उन्हें किर्गिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वागत किया। इसके बाद उनका कार्यक्रम SCO सम्मेलन और विभिन्न नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों पर केंद्रित है।

SCO के 25 साल, 10 देशों का प्रभावशाली मंच

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना वर्ष 2001 में क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ इसका विस्तार हुआ और आज इसमें भारत सहित 10 पूर्ण सदस्य देश शामिल हैं। SCO क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग और संपर्क से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच संवाद का एक प्रमुख मंच बन चुका है। हालांकि सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हितों के कारण संगठन के सामने कई चुनौतियां भी हैं, फिर भी वैश्विक राजनीति में इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है बिश्केक सम्मेलन?

बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक बहुपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय नेताओं के साथ सीधे संवाद का महत्वपूर्ण अवसर भी है। रूस के साथ रणनीतिक संबंध, चीन के साथ संवाद, मध्य एशिया में आर्थिक भागीदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। मोदी-पुतिन की बैठक से भारत-रूस संबंधों की दिशा को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है, जबकि सम्मेलन के दौरान होने वाली अन्य कूटनीतिक मुलाकातें भी आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति पर असर डाल सकती हैं। कुल मिलाकर, SCO Summit 2026 में बिश्केक भारत की सक्रिय कूटनीति का अहम केंद्र बन गया है, जहां प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों और वैश्विक मुद्दों पर भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब से देखा जा रहा है।
 


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