Assam Flood News 2026: असम इस समय भीषण बाढ़ की मार झेल रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश और उफनती नदियों ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस आपदा में अब तक 85 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब डेढ़ लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई जिलों में सैकड़ों गांव जलमग्न हैं और हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों तथा राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। राज्य सरकार और प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में लगातार जुटे हुए हैं, लेकिन बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान के कारण लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
पांच जिलों में सबसे ज्यादा असर
बाढ़ का सबसे अधिक असर राज्य के पांच जिलों में देखने को मिला है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। कई सड़कें बह गई हैं और पुलों को नुकसान पहुंचा है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई आ रही है। हालांकि कुछ इलाकों में पानी धीरे-धीरे उतरना शुरू हुआ है, लेकिन हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं। प्रभावित परिवारों के सामने भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
शिवसागर का नेपाली खुटी गांव सबसे ज्यादा प्रभावित
शिवसागर जिले का नेपाली खुटी गांव बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहा है। लगभग 150 परिवारों वाला यह गांव वर्षों से डेयरी व्यवसाय के लिए जाना जाता था। यहां हर दिन सैकड़ों लीटर दूध आसपास के कस्बों तक भेजा जाता था, जिससे ग्रामीणों की आजीविका चलती थी। लेकिन इस बार की बाढ़ ने पूरे गांव की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। ग्रामीणों की गायें, पशुशालाएं, चारा और अन्य संसाधन बाढ़ की चपेट में आ गए। कई परिवारों की वर्षों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई।
132 गांव प्रभावित, हजारों परिवार संकट में
नज़ीरा क्षेत्र में बाढ़ का असर बेहद गंभीर रहा है। यहां 132 गांव प्रभावित हुए हैं और 30 हजार से अधिक परिवार इस प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। तेज बारिश के कारण अचानक पानी गांवों में घुस गया, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कई घर पूरी तरह डूब गए, जबकि कुछ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए छतों और पेड़ों का सहारा लिया।
दर्जनों घर बह गए, लोगों के सामने आजीविका का संकट
ग्रामीणों के अनुसार, नेपाली खुटी गांव के लगभग 150 घरों में से करीब 70 घर या तो पूरी तरह बह चुके हैं या फिर रहने योग्य नहीं बचे हैं। बाढ़ के बाद खेत, फसलें, पशुधन और घरेलू सामान भी नष्ट हो गए हैं। इससे हजारों परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राहत शिविरों में रह रहे लोग अब अपने घरों और जीवन को दोबारा पटरी पर लाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
राहत कार्य जारी, लेकिन चुनौतियां बरकरार
प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, भोजन और चिकित्सा सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। बचाव दल लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी बाढ़ के बाद उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पानी उतरने के बाद पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की मरम्मत सबसे बड़ी चुनौती होगी।