नई दिल्ली: दिल्ली में छात्रों के पाठ्यक्रम में जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। दिल्ली सरकार के स्कूलों के छात्र जल्द ही 'राष्ट्रनीति' नामक एक नए कार्यक्रम के तहत स्वतंत्रता सेनानियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ-साथ आरएसएस का भी अध्ययन करेंगे। 18 सितंबर को नमो विद्या उत्सव के दौरान सीएम रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री सूद द्वारा शुरू किया गया 'राष्ट्रनीति' कार्यक्रम, दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक लागू किया जा रहा है। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और उसमें आरएसएस पर पाठ शामिल होंगे। आरएसएस के महत्वपूर्ण नेता और सामाजिक गतिविधियों के साथ ही उसका इतिहास भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे। ड्राफ्ट तैयार होने के बाद विवरण जारी किया जाएगा। 'राष्ट्रनीति' कार्यक्रम किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक लागू होगा, और 'राष्ट्रनीति' सत्र हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को लागू होगा।
आरएसएस की स्थापना:
पाठ्यक्रम में 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा आरएसएस की स्थापना, उसकी विचारधारा से लेकर केदारनाथ, बिहार बाढ़ और कोविड-19 महामारी सहित समाज सेवा-राहत कार्यों में उसके कार्यकर्ताओं की भूमिका पर अध्याय शामिल होंगे। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और पीएम नरेंद्र मोदी जैसे आरएसएस से जुड़े नेताओं के योगदान पर भी पाठ्यक्रम में प्रकाश डाला जाएगा
एनईपी ने दिशा निर्देश जारी किए:
18 सितंबर को नमो विद्या उत्सव के दौरान सीएम रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री सूद द्वारा शुरू किया गया 'राष्ट्रनीति कार्यक्रम, दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में किंडरगार्टन से 12वीं कक्षा तक लागू किया जा रहा है। शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020, ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। दस्तावेजों में कहा गया है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र उप-समितियों और युवा संसदों, जैसे व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से नागरिक उत्तरदायित्व, नैतिक नेतृत्व और संवैधानिक मूल्यों का विकास करना है।