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राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मानहानि केस के ट्रायल पर लगी रोक; 4 हफ्ते में देना होगा जवाब

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, मानहानि केस के ट्रायल पर लगी रोक; 4 हफ्ते में देना होगा जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में निचली अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही, राहुल गांधी की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

यह मामला राहुल गांधी के उन कथित बयानों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 'चोरों का सरदार' और 'कमांडर-इन-थीफ' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। इन टिप्पणियों को लेकर बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर मांगा जवाब

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने इससे पहले मानहानि मामले को रद्द करने की उनकी मांग खारिज कर दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मामले में ट्रायल कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी।

राहुल गांधी ने शिकायत की वैधता पर उठाए थे सवाल

राहुल गांधी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि बीजेपी कार्यकर्ता की शिकायत कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है।

कांग्रेस नेता की ओर से कहा गया था कि उन्होंने अपनी टिप्पणी में किसी निश्चित और पहचान योग्य समूह को सीधे निशाना नहीं बनाया था। ऐसे में किसी स्पष्ट पीड़ित व्यक्ति या समूह की पहचान का सवाल उठता है, जिसके आधार पर मानहानि का मुकदमा चलाया जा सके।

हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया था और मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

बीजेपी कार्यकर्ता ने क्यों दर्ज कराई थी शिकायत?

यह शिकायत बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी किया था।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ बीजेपी और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को 'चोरों का सरदार' कहने का आशय पार्टी के सदस्यों को भी चोर बताने से था।

शिकायतकर्ता ने यह भी दलील दी थी कि वह लंबे समय से बीजेपी के सक्रिय सदस्य हैं और विवादित बयान से पार्टी के सदस्यों की छवि प्रभावित हुई है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि शिकायतकर्ता के बीजेपी का सक्रिय सदस्य होने और विवादित टिप्पणी के संदर्भ को देखते हुए शुरुआती स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बयान केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित था।

अदालत के अनुसार, टिप्पणी का वास्तविक आशय क्या था और उसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, इन पहलुओं पर ट्रायल के दौरान विचार किया जा सकता है। हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समन आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया था।

इस मामले में हाई कोर्ट ने शशि थरूर से जुड़े एक अन्य प्रकरण का भी उल्लेख किया था। उस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने राजनीतिक पार्टी को पंजीकरण के आधार पर पहचान योग्य और निश्चित संस्था मानने से संबंधित टिप्पणी की थी।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल ट्रायल कोर्ट में मानहानि मामले की कार्यवाही रुकी रहेगी। संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देना है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट राहुल गांधी की याचिका पर आगे विचार करेगा।

इस मामले में अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। फिलहाल अदालत ने केवल ट्रायल की कार्यवाही पर रोक लगाई है और मानहानि की शिकायत को अंतिम रूप से खारिज नहीं किया है।


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