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PMO New Address: सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा प्रधानमंत्री कार्यालय, जानिए क्यों बदले गए देश के अहम पते और नाम...

PMO New Address: सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा प्रधानमंत्री कार्यालय, जानिए क्यों बदले गए देश के अहम पते और नाम...

नई दिल्ली। भारत के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का पता बदलने जा रहा है। दशकों से रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक में कार्य कर रहा प्रधानमंत्री कार्यालय अब अपने नए पते ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होगा। यह नया कार्यालय विजय चौक के पास, नए संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित है और सेंट्रल विस्टा परियोजना का अहम हिस्सा है। शुरुआत में इस परिसर को Executive Enclave कहा जा रहा था, लेकिन दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ कर दिया गया।

‘प्रधान सेवक’ की अवधारणा से जुड़ा है सेवा तीर्थ:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से स्वयं को प्रधानमंत्री की बजाय ‘प्रधान सेवक’ कहते आए हैं। इसी सोच को साकार करता है प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम-सेवा तीर्थ। यह नाम यह दर्शाता है कि सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि 145 करोड़ देशवासियों की सेवा का माध्यम है। संदेश साफ है शासन का केंद्र अब शक्ति नहीं, सेवा है।

राजपथ से कर्तव्य पथ सोच में बदलाव का प्रतीक:

मोदी सरकार के दौरान केवल इमारतें नहीं बदलीं, नामों के जरिए सोच बदली गई। दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ अब कर्तव्य पथ कहलाता है। इसके पीछे तर्क स्पष्ट था, स्वतंत्र भारत में ‘राज’ नहीं, बल्कि कर्तव्य का मार्ग होना चाहिए। इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक फैला यह मार्ग अब नागरिकों और जनप्रतिनिधियों दोनों को उनके दायित्व की याद दिलाता है।

नए संसद भवन में भारतीय संस्कृति की छाप:

नए संसद भवन में प्रवेश के लिए बनाए गए छह द्वार भारतीय परंपरा और दर्शन को दर्शाते हैं, जिसमें मकर द्वार, हंस द्वार, शार्दुल द्वार, गज द्वार, अश्व द्वार, गरुड़ द्वार ये द्वार बुद्धि, साहस, धर्म, शक्ति, ज्ञान और आत्मबोध के प्रतीक हैं। वहीं पुराने संसद भवन को अब संविधान सदन नाम दिया गया है, क्योंकि यहीं भारत के संविधान का निर्माण हुआ था।

 राज भवन से लोक भवन तक का सफर:

मोदी सरकार ने हाल ही में देशभर के राज भवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया। राज शब्द को गुलामी की मानसिकता से जोड़ते हुए इसे हटाया गया। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि अगले दशक में देश से गुलामी के सभी प्रतीकों को हटाया जाएगा।

 कर्तव्य भवन और युगे युगीन भारत संग्रहालय:

नए केंद्रीय सचिवालय में मंत्रालयों को कर्तव्य भवन नाम दिया गया है। नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को बदलकर बनाया जा रहा है युगे युगीन भारत संग्रहालय यह दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल होगा। भारत के 5000 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा

सिर्फ पते नहीं बदले, मानसिकता बदली है:

पीएमओ का नया पता केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है। यह संकेत है कि लोकतंत्र अब राज करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और कर्तव्य का प्रतीक बन रहा है। यह बदलाव बताता है कि भारत अब सत्ता के प्रदर्शन से आगे बढ़कर जनसेवा, संस्कृति और जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहा है।


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