दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ बिल्डिंग कॉम्पलेक्स का उद्घाटन किया, जहां से अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) संचालित होगा। इस कदम के साथ देश के पॉवर सेंटर में बड़ा बदलाव माना जा रहा है और प्रशासनिक व्यवस्था के एक नए दौर की शुरुआत हुई है। दोपहर करीब 1:30 बजे प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ नाम का अनावरण किया। इसी परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय को एक साथ स्थानांतरित कर दिया गया है, जो पहले अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे।
औपनिवेशिक प्रतीकों से आधुनिक शासन की ओर कदम:
साल 2014 के बाद केंद्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे और प्रतीकों में कई बदलाव किए हैं। साउथ ब्लॉक को ‘सेवा तीर्थ’, सेंट्रल सचिवालय को ‘कर्तव्य भवन’, राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’, रेस कोर्स रोड को ‘लोक कल्याण मार्ग’, राज भवन/राज निवास को ‘लोक भवन/लोक निवास’ इन बदलावों को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि शासन के दृष्टिकोण और सार्वजनिक भागीदारी में परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों जरूरी था नया प्रशासनिक परिसर:
दशकों तक केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुराने भवनों से संचालित होते रहे। इससे मंत्रालयों के बीच समन्वय में दिक्कत रखरखाव लागत में वृद्धि, कर्मचारियों के लिए सीमित कार्य-परिसर और नई व्यवस्था में प्रशासनिक इकाइयों को एक ही आधुनिक कैंपस में समाहित कर इन समस्याओं का समाधान करने का दावा किया गया है।
‘सेवा तीर्थ’ की खास विशेषताएं:
1. डिजिटल और पब्लिक-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर
कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल तकनीक से लैस कार्यालय, सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन और जनता से संवाद के लिए विशेष पब्लिक एरिया बनाए गए हैं।
2. पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन
4-स्टार GRIHA मानक
रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम
जल संरक्षण और वेस्ट मैनेजमेंट
ऊर्जा दक्ष निर्माण तकनीक
इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
3. हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था
स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल
एडवांस सर्विलांस नेटवर्क
इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम
अधिकारियों और आगंतुकों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया गया है।
आधुनिक डिजाइन में भारतीय पहचान:
नया PMO “ओपन फ्लोर” मॉडल पर आधारित है, जहां बंद कमरों की बजाय खुले और आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र बनाए गए हैं।
बेहतर समन्वय और तेज निर्णय प्रक्रिया
आधुनिक लेकिन सादा कार्यालय वातावरण
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए उन्नत बैठक कक्ष
पारंपरिक भारतीय सौंदर्य और आधुनिक वास्तुकला का समन्वय
दो युगों के बीच बदलाव का प्रतीक:
नॉर्थ और साउथ ब्लॉक (1910-1930) औपनिवेशिक भव्यता ऊंचे स्तंभ, गुंबद और लाल-बफ सैंडस्टोन के प्रतीक रहे हैं। इसके विपरीत ‘सेवा तीर्थ’ सादगी, पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर आधारित आधुनिक प्रशासनिक सोच को दर्शाता है। ‘सेवा तीर्थ’ केवल प्रधानमंत्री कार्यालय का नया पता नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के बदलते स्वरूप, प्रशासनिक केंद्रीकरण, तकनीकी आधुनिकीकरण और भारतीय पहचान के समावेश का प्रतीक बनकर उभरा है। इस नई शुरुआत को देश के प्रशासनिक ढांचे में दीर्घकालिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।