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पेट्रोल 367 के पार, डीजल 392 रुपये पहुंचा; 3 दिन में तीसरी बढ़ोतरी

पेट्रोल 367 के पार, डीजल 392 रुपये पहुंचा; 3 दिन में तीसरी बढ़ोतरी

Pakistan Petrol Diesel Price: पाकिस्तान में महंगाई से परेशान आम लोगों पर ईंधन की कीमतों ने एक बार फिर बड़ा बोझ डाल दिया है। सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल के दामों में दोबारा बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 10 सितंबर 2026 से लागू हो गई हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 367.75 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर, जबकि हाई-स्पीड डीजल 392.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

पेट्रोल के दाम में 3.40 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। वहीं, डीजल की कीमत में सीधे 6.72 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। खास बात यह है कि पिछले तीन दिनों में यह तीसरी बार है जब पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें बढ़ाई गई हैं।

तीन दिन में पेट्रोल-डीजल पर तीसरा झटका

पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। एक हफ्ते से भी कम समय में पेट्रोल 21.88 रुपये और डीजल 14.62 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।

ईंधन की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी का सिलसिला इस तरह रहा—

8 सितंबर: पेट्रोल 12.90 रुपये और डीजल 3.72 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ।
9 सितंबर: पेट्रोल में 5.58 रुपये और डीजल में 4.18 रुपये की बढ़ोतरी हुई।
10 सितंबर: पेट्रोल 3.40 रुपये और डीजल 6.72 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया।

इस तरह महज तीन दिनों में पाकिस्तान के लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है।

क्यों बढ़ रहे पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईंधन की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है।

पाकिस्तान अपनी घरेलू जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।

टैक्स और IMF का दबाव भी बड़ी वजह

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल महंगा होने के पीछे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें ही जिम्मेदार नहीं हैं। सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और IMF के साथ हुए समझौतों की शर्तें भी ईंधन की कीमतों पर बड़ा असर डाल रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार पेट्रोल पर करीब 114 रुपये और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर टैक्स, कस्टम ड्यूटी और पेट्रोलियम लेवी के रूप में वसूल रही है।

वित्तीय संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने और अपने खर्च को नियंत्रित करने का दबाव है। ऐसे में ईंधन पर सब्सिडी का बोझ कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

15 दिन की जगह अब रोज बदल सकती है कीमत

पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों को लेकर व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा 15 दिन के अंतराल पर होती थी। अब Daily Pricing Mechanism के तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव का असर घरेलू बाजार में तेजी से डालने की व्यवस्था लागू की गई है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर पाकिस्तान में भी पेट्रोल और डीजल के दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं।

IMF की 'Full Cost Recovery' नीति क्या है?

पाकिस्तान पर IMF के कर्ज और बेलआउट कार्यक्रम की शर्तों का भी दबाव है। इनमें ईंधन क्षेत्र में Full Cost Recovery मॉडल को लागू करना महत्वपूर्ण है।

इस मॉडल के तहत तेल की खरीद, रिफाइनिंग और परिवहन सहित पूरी लागत की वसूली उपभोक्ताओं से करने पर जोर दिया जाता है। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने की स्थिति में सरकार लंबे समय तक कीमतों को कृत्रिम रूप से कम रखकर नुकसान नहीं उठा सकती। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के साथ पाकिस्तान में इसका असर सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई दे रहा है।

कर्ज के बोझ के बीच सरकार की बढ़ी मुश्किलें

पाकिस्तान पहले से ही भारी विदेशी और घरेलू कर्ज के दबाव में है। सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज पर ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। ऐसे हालात में तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बड़ी सब्सिडी देना सरकार के लिए मुश्किल हो गया है।

अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी और IMF की शर्तों के बीच सरकार का पूरा दबाव उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमतों के रूप में दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों से परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने का असर आने वाले दिनों में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।


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