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एक दिन में दो परीक्षाएं: माशिम और डीपीआई के आदेश से स्कूलों में बढ़ा दबाव, शिक्षक-छात्र परेशान...

एक दिन में दो परीक्षाएं: माशिम और डीपीआई के आदेश से स्कूलों में बढ़ा दबाव, शिक्षक-छात्र परेशान...

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में इन दिनों शिक्षकों और विद्यार्थियों पर परीक्षा का दोहरा दबाव बन गया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिम) और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी आदेशों के चलते कई विद्यालयों में एक ही दिन में दो-दो परीक्षाएं आयोजित करने की स्थिति बन गई है। माशिम ने पहले ही दिसंबर माह में 10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाओं की समय-सारिणी जारी कर दी थी। इसके तहत स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि 1 से 20 जनवरी तक प्रायोगिक परीक्षाएं संपन्न कर अंक ऑनलाइन प्रेषित करें। इसी बीच डीपीआई द्वारा प्री-बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नया आदेश जारी कर दिया गया, जिसमें सभी जिलों को 15 जनवरी तक प्री-बोर्ड परीक्षाएं पूरी कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

तालमेल के अभाव से बढ़ी परेशानी:

माशिम और डीपीआई के आदेशों में तालमेल नहीं होने के कारण स्कूलों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दोनों परीक्षाओं की तिथियां लगभग एक-दूसरे से टकरा रही हैं, जिससे कार्य दिवस कम पड़ रहे हैं और विद्यालयों को मजबूरी में एक दिन में दो परीक्षाएं करानी पड़ रही हैं।

प्रायोगिक परीक्षा में बाह्य परीक्षक अनिवार्य:

10वीं और 12वीं की प्रायोगिक परीक्षाओं में बाह्य परीक्षक की व्यवस्था अनिवार्य है। यानी दूसरे स्कूलों के शिक्षक परीक्षा लेने आते हैं। ऐसे में जब शिक्षक प्रायोगिक परीक्षा के लिए अन्य विद्यालयों में जाते हैं, तो उनकी कक्षाओं की परीक्षाएं और उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रभावित हो रहा है।

पढ़ाई को लेकर बढ़ी चिंता:

विद्यालय प्रबंधन के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि एक साथ परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और प्रायोजना कार्यों को कैसे संभाला जाए। शिक्षक, छात्र और पालक सभी तनाव में लगातार परीक्षाओं के कारण जहां शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ा है, वहीं विद्यार्थियों में भी मानसिक तनाव और शैक्षणिक दबाव साफ नजर आ रहा है। पालकों में बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

टीचर्स एसोसिएशन ने की तिथियों में बदलाव की मांग:

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने परीक्षा तिथियों में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि माशिम और डीपीआई के बीच समुचित तालमेल नहीं होने का खामियाजा सीधे तौर पर शिक्षक, विद्यार्थी और पालक भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश स्कूलों में बाह्य परीक्षकों की उपलब्धता के कारण 5 जनवरी के बाद ही प्रायोगिक परीक्षाएं शुरू हो सकी हैं, जबकि प्री-बोर्ड परीक्षा के लिए अलग से समय और तैयारी की आवश्यकता होती है। ऐसे में वर्तमान आदेश व्यवहारिक नहीं हैं।

जल्द समाधान की उम्मीद:

शिक्षक संगठनों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि परीक्षा कार्यक्रमों में समन्वय बनाकर तिथियों में संशोधन किया जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई और शिक्षकों का कार्य प्रभावित न हो।


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