छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मामले की दिशा बदल दी है। डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी अमित जोगी को दोषी करार दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त छह महीने की सजा भुगतनी होगी।
सीबीआई की अपील मंजूर, याचिका खारिज
हाई कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया है। वहीं, शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य आरोपियों की सजा पहले ही बरकरार रखी जा चुकी है, इसलिए इस याचिका पर अलग से विचार की आवश्यकता नहीं है।
तीन हफ्ते का समय, करना होगा सरेंडर
फैसले के अनुसार, अमित जोगी फिलहाल जमानत पर हैं, लेकिन उनकी जमानत केवल तीन सप्ताह तक ही मान्य रहेगी। इस अवधि के भीतर उन्हें ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अदालत के निर्देश पर उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया जाएगा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे साक्ष्य मौजूद हों, तो किसी एक आरोपी को अलग से राहत देना न्यायसंगत नहीं है। जब तक किसी आरोपी के पक्ष में ठोस और स्वतंत्र आधार न हो, तब तक उसे बरी नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुई सुनवाई
इस मामले में पहले हाई कोर्ट ने सीबीआई और सतीश जग्गी की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने देरी को माफ करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाई कोर्ट भेजा और निर्देश दिया कि सभी पक्षों को शामिल किया जाए।
23 साल पुराना मामला
यह पूरा मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो बाद में सरकारी गवाह बन गए थे।
पहले अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ उनके बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद अब यह नया फैसला सामने आया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
रामअवतार जग्गी एक प्रभावशाली कारोबारी और नेता थे, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। एनसीपी में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई थी। इस हत्याकांड में कई अन्य आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, जिनकी सजा हाई कोर्ट द्वारा बरकरार रखी गई है।