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संसद का विशेष सत्र आज से शुरू, लोकसभा में पेश होगा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’, महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण...

संसद का विशेष सत्र आज से शुरू, लोकसभा में पेश होगा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’, महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण...

रायपुर। देश की राजनीति में आज एक अहम दिन माना जा रहा है, क्योंकि संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। इस सत्र के दौरान केंद्र सरकार लोकसभा में बहुप्रतीक्षित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2026’ विधेयक पेश करने जा रही है। इस प्रस्तावित कानून के तहत लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

राजनीति में महिलाओं की बढ़ेगी भागीदारी  

सरकार का कहना है कि इस विधेयक के लागू होने से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका मजबूत होगी। लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब ठोस पहल होने से देशभर की महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बिल देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाएगा। वहीं, विभिन्न सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। अब सभी की नजरें संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

तीन दिन का विशेष सत्र, आज से गरमाएगा माहौल

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर संसद में सरकार 33% महिला आरक्षण से जुड़े अहम संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। यह सत्र 18 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें विधेयक पर विस्तृत चर्चा और आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33%) आरक्षण देने की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसे देश में महिला राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित

संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें राज्यों के लिए अधिकतम 815 सीटें, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें, कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित है, सीटों के अंतिम निर्धारण के लिए परिसीमन प्रक्रिया लागू की जाएगी, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है।

सरकार vs विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप तेज

महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने इसे “चुनावी स्टंट” करार देते हुए कहा कि सरकार चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रही है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सत्ता संतुलन बदलने की कोशिश कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी बिल के समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावों के बीच जल्दबाजी बताया।

विपक्ष की रणनीति बैठक

विशेष सत्र से पहले विपक्षी दलों ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में बैठक कर संयुक्त रणनीति बनाने की तैयारी की है। इससे साफ है कि संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

सरकार का पक्ष: ऐतिहासिक कदम

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस विधेयक को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं को पूरा राजनीतिक अधिकार मिलेगा और यह सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल “महिला-विरोधी सोच” के कारण इसका विरोध कर रहे हैं।

परिसीमन पर भी उठे सवाल

शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए इसे कुछ राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण बताया। उनका कहना है कि जनसंख्या आधारित सीट निर्धारण से पंजाब जैसे राज्यों को नुकसान हो सकता है।

महिलाओं में उत्साह, समाज से समर्थन

उद्यमी और पद्मश्री सम्मानित कल्पना सरोज ने इस बिल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे महिलाओं को शासन और प्रशासन में वास्तविक भागीदारी मिलेगी और वे नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगी।

क्या है आगे की प्रक्रिया?

संसद में 16 से 18 अप्रैल तक चर्चा होगा, संशोधन विधेयकों पर बहस और सुझाव दिए जाएंगे, फिर पारित होने के बाद लागू करने की प्रक्रिया तय होगी और आखिर परिसीमन और सीट निर्धारण के बाद ही आरक्षण लागू होगा।  

संसद की बहस और अंतिम फैसले पर नजर 

महिला आरक्षण विधेयक एक ऐतिहासिक और संवेदनशील मुद्दा बन चुका है, जिस पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके समय, प्रक्रिया और परिसीमन को लेकर सवाल उठा रहा है। अब नजरें संसद की बहस और अंतिम फैसले पर टिकी हैं।


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