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बालोद में 45 डिग्री तापमान बना जानलेवा, दल्लीराजहरा में चमगादड़ों की सामूहिक मौत...

बालोद में 45 डिग्री तापमान बना जानलेवा, दल्लीराजहरा में चमगादड़ों की सामूहिक मौत...

बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के सबसे बड़े नगर पालिका क्षेत्र दल्लीराजहरा में भीषण गर्मी का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नगर के बीएसपी एमव्हीटी सेंटर के पास लगे पेड़ों में रहने वाले सैकड़ों चमगादड़ तेज गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण रोजाना मर रहे हैं। इलाके का तापमान दोपहर में 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे चमगादड़ों का जीवित रहना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हर सुबह बड़ी संख्या में मृत चमगादड़ पेड़ों के नीचे पड़े दिखाई देते हैं। मृत चमगादड़ों से उठने वाली तेज बदबू के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। सड़क से गुजरने वाले आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नगर पालिका की टीम रोज कर रही सफाई

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका की टीम रोज सुबह मौके पर पहुंच रही है। कर्मचारी मृत चमगादड़ों को एकत्र कर नगर पालिका की गाड़ी से बाहर ले जाकर डी-कंपोज कर रहे हैं, ताकि संक्रमण और दुर्गंध की समस्या को कम किया जा सके। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि रोजाना बड़ी संख्या में चमगादड़ों की मौत होने के कारण कई शव वहीं पड़े रह जाते हैं, जिससे बदबू लगातार फैल रही है।

गर्मी और पेड़ों की कटाई बनी बड़ी वजह

पर्यावरण संरक्षणकर्ताओं का मानना है कि लगातार बढ़ रहा तापमान और पेड़ों की कटाई वन्यजीवों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। पर्यावरण प्रेमी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि चमगादड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कीट नियंत्रण और परागण में मदद करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में इनकी मौत होना पर्यावरण के लिए गंभीर संकेत है। उन्होंने कहा कि तापमान नियंत्रित करने और वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जरूरी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

इलाके के निवासियों का कहना है कि गर्मी के कारण हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त सफाई व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।


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