वेनेजुएला की जानी-मानी विपक्षी नेता और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की कट्टर आलोचक मारिया कोरिना मचाडो एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में हैं। वर्ष 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली मचाडो ने अब एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अपना नोबेल मेडल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने मेडल स्वीकार करते हुए मचाडो को “एक असाधारण और साहसी महिला” बताया और कहा कि यह कदम “आपसी सम्मान और संघर्ष की पहचान” है।
नोबेल समिति ने क्यों चुना मचाडो को:
नोबेल समिति ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि मारिया कोरिना मचाडो ने “तानाशाही और दमन के दौर में लोकतंत्र की लौ को जलाए रखा।”समिति के अनुसार, लैटिन अमेरिका में हाल के वर्षों में मचाडो साहस, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनआंदोलन की सबसे बड़ी प्रतीक बनकर उभरी हैं।
क्यों ट्रंप को समर्पित किया पुरस्कार:
मारिया मचाडो ने नोबेल पुरस्कार वेनेजुएला की जनता और डोनाल्ड ट्रंप दोनों को समर्पित किया। ट्रंप पहले ही कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों को रुकवाने में अहम भूमिका निभाई, हालांकि उन्हें औपचारिक रूप से नोबेल नहीं मिला। मचाडो ने इसे “नैतिक सम्मान” बताते हुए कहा कि ट्रंप ने वेनेजुएला संकट में निर्णायक भूमिका निभाई।
कौन हैं वेनेजुएला की ‘आयरन लेडी’ मारिया कोरिना मचाडो:
58 वर्षीय मारिया कोरिना मचाडो वेनेजुएला की सबसे प्रभावशाली कंजर्वेटिव नेताओं में से एक हैं। उनकी लोकप्रियता से डरकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने उन्हें 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पूर्व राजनयिक एडमुनदो गोंजालेस का समर्थन किया, जिनकी जीत के दावे के बावजूद मादुरो सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
अंडरग्राउंड जीवन और दमन का दौर:
चुनाव के बाद मादुरो सरकार ने विपक्ष पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। एडमुनदो गोंजालेस को निर्वासन जाना पड़ा और मचाडो को महीनों तक छिपकर रहना पड़ा, काराकास में अपने आखिरी सार्वजनिक भाषण में मचाडो ने कहा था “तानाशाही का अंत तय है, और आज़ादी का समय करीब है।”
मादुरो की गिरफ्तारी और नई राजनीतिक उलझन:
अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो की गिरफ्तारी हुई और वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद जगी। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने डेल्सी रोड्रिगेज को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में समर्थन देकर मचाडो की उम्मीदों को झटका दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि वे मचाडो को फिलहाल देश का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त नहीं मानते।
क्या नोबेल मेडल देना राजनीतिक रणनीति है:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोबेल मेडल ट्रंप को सौंपना मचाडो की एक कूटनीतिक कोशिश हो सकती है ताकि वे भविष्य में अमेरिकी समर्थन फिर से हासिल कर सकें। ट्रंप ने इस कदम को “बेहद खूबसूरत और सम्मानजनक संकेत” बताया है। मारिया कोरिना मचाडो सिर्फ वेनेजुएला की विपक्षी नेता नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में लोकतंत्र बनाम तानाशाही की एक मजबूत आवाज बन चुकी हैं।