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Manipur Violence: नोनी में हिंसक वारदात के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, तीन की मौत

Manipur Violence: नोनी में हिंसक वारदात के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा, तीन की मौत

इंफाल। मणिपुर में जातीय तनाव और हिंसक घटनाओं का दौर लगातार जारी है। राज्य के नोनी जिले में दो हथियारबंद गुटों के बीच हुई मुठभेड़ में कुकी-जो समुदाय के तीन लोगों की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। इस मामले में कुकी आदिवासी संगठन कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मृतक गांव की सुरक्षा में तैनात स्वयंसेवक थे और उन्हें NSCN-IM तथा जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (ZUF-K) के कामसन गुट के सशस्त्र सदस्यों ने निशाना बनाया। वहीं, पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, तीनों लोगों की मौत दो हथियारबंद समूहों के बीच हुई गोलीबारी के दौरान हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

कुकी संगठन ने सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कुकी इनपी मणिपुर ने शनिवार को जारी अपने बयान में राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। संगठन के सूचना एवं प्रचार सचिव जांगहाओलुन हाओकिप के मुताबिक, संवेदनशील गांवों में संभावित हमलों को लेकर प्रशासन को पहले ही आगाह किया गया था। इसके बावजूद ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। संगठन का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को अपने गांवों और परिवारों की रक्षा के लिए स्वयंसेवकों की भूमिका निभानी पड़ रही है। KIM ने यह आरोप भी लगाया कि घटना के बाद मृतकों के शवों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया कुकी संगठन ने सरकार से दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही नोनी जिले के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

इंफाल में SoO समझौता समाप्त करने के लिए सड़कों पर उतरे लोग

नोनी की घटना के बीच राजधानी इंफाल में भी विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। शनिवार को सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को खत्म करने और मूल निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर बड़ी रैली निकाली गई। इस प्रदर्शन का नेतृत्व मैतेयी समुदाय के प्रमुख संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने किया। रैली को कई नगा संगठनों का भी समर्थन प्राप्त हुआ प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मार्च की शुरुआत इंफाल पश्चिम जिले के टिडिम मैदान से हुई और प्रदर्शनकारी थाउ मैदान की ओर बढ़े। हालांकि, लोक भवन, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा के प्रदेश कार्यालय की तरफ जाने वाले रास्तों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को निर्धारित सीमा से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई।

चंदेल और सेनापति में भी नगा संगठनों का विरोध मार्च

इंफाल के अलावा चंदेल और सेनापति जिलों में भी नगा संगठनों ने रैलियां आयोजित कीं। इन संगठनों ने कुकी-जो उग्रवादी गुटों पर हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए और केंद्र तथा राज्य सरकार से SoO समझौता समाप्त करने की मांग दोहराई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य में शांति स्थापित करने और स्थानीय आबादी की सुरक्षा के लिए मौजूदा सुरक्षा एवं संघर्षविराम व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।

मैतेयी समुदाय के 14 लोगों पर हमले के बाद बढ़ी चिंता

मणिपुर में ताजा विरोध-प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह हाल ही में मैतेयी समुदाय के लोगों पर हुआ हमला भी है। कुछ दिन पहले 14 लोगों को निशाना बनाकर घात लगाकर गोलीबारी की गई थी। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था और शांति बहाली को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अलग-अलग समुदायों और संगठनों की ओर से सुरक्षा को लेकर उठाई जा रही मांगों के बीच प्रशासन के सामने हालात सामान्य बनाए रखने की चुनौती है।

क्या है SoO समझौता?

सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस यानी SoO समझौता अगस्त 2008 में केंद्र सरकार, मणिपुर सरकार और कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के बीच हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य संबंधित संगठनों के साथ संघर्षविराम की व्यवस्था स्थापित करना था। इस समझौते के तहत उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और बातचीत के जरिए शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, राज्य में जारी हिंसा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अब कई मैतेयी और नगा संगठन इस समझौते को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।फिलहाल नोनी गोलीबारी की जांच जारी है। राज्य में लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के बीच सभी की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और शांति बहाली के प्रयासों पर टिकी हैं।


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