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लखनऊ अग्निकांड ने उजाड़े 15 परिवार, 4 अधिकारियों पर गिरी गाज; 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

लखनऊ अग्निकांड ने उजाड़े 15 परिवार, 4 अधिकारियों पर गिरी गाज; 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

Lucknow Aliganj Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को उस दर्दनाक हादसे की गवाह बनी, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। अलीगंज स्थित एक एनिमेशन कोचिंग एवं प्रशिक्षण केंद्र में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे ने सिर्फ एक इमारत को नहीं जलाया, बल्कि 15 परिवारों की उम्मीदें, सपने और भविष्य भी अपने साथ राख कर दिया। मृतकों में सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुष्का, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविश्य, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजान, जयनिज चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या शामिल हैं। हर नाम के पीछे एक परिवार की उम्मीदें थीं, जो अब सिर्फ यादों में सिमट गई हैं।

अस्पताल और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पसरा मातम

हादसे के बाद अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस के बाहर का दृश्य बेहद भावुक था। परिजन अपनों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। कई परिवारों को देर रात तक उम्मीद थी कि शायद कोई चमत्कार हो जाए, लेकिन हर गुजरते पल के साथ उम्मीद टूटती चली गई।एक पिता बार-बार यही कहते रहे कि उनका बेटा सुबह घर से यह कहकर निकला था कि शाम तक वापस लौट आएगा। लेकिन वह वादा हमेशा के लिए अधूरा रह गया।

आदित्य की मां ने उठाए रेस्क्यू ऑपरेशन पर सवाल

हादसे में जान गंवाने वालों में आदित्य श्रीवास्तव भी शामिल थे। उनकी मां कल्पना श्रीवास्तव ने दावा किया कि यदि शुरुआती समय में बचाव अभियान अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जाता तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।उन्होंने आरोप लगाया कि आग लगने के शुरुआती चरण में जिस दिशा से धुआं निकल रहा था, वहां से तुरंत राहत कार्य शुरू नहीं किया गया। उनका कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचाने और उपचार मिलने से कुछ लोगों की जान बच सकती थी।

अंदर से आती रहीं मदद की चीखें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद इमारत के भीतर फंसे लोग लगातार मदद की गुहार लगा रहे थे। घना धुआं और आग की तेज लपटें लोगों के बाहर निकलने में सबसे बड़ी बाधा बन गईं।बताया जा रहा है कि कई लोग अपने परिजनों को मोबाइल फोन पर अंतिम बार कॉल कर रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक पूरा इलाका लंबे समय तक चीखों और अफरा-तफरी की आवाजों से गूंजता रहा।

दीवार तोड़कर चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन

जब मुख्य रास्ते से राहत कार्य मुश्किल हो गया तो प्रशासन ने पास की इमारत की दीवार तोड़कर अंदर पहुंचने का फैसला किया। हालांकि, इमारत के भीतर धुएं की मात्रा इतनी अधिक थी कि बचावकर्मियों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।हर मिनट के साथ स्थिति गंभीर होती चली गई और आखिरकार मृतकों की संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई।

मुख्यमंत्री योगी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिए और घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों से पूरी जानकारी लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।देर रात रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

भवन की वैधता और सुरक्षा व्यवस्था जांच के घेरे में

अग्निकांड के बाद भवन की स्वीकृति, निर्माण मानकों और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भवन को मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी।बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर इस भवन के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी, लेकिन बाद में आदेश निरस्त कर दिया गया था। अब पूरे मामले की दोबारा जांच की जा रही है।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 6 लोगों पर मुकदमा

अलीगंज पुलिस ने इस मामले में छह नामजद आरोपियों और कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा उत्तर प्रदेश अग्नि सेवा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। साथ ही इमारत को सील कर दिया गया है और फोरेंसिक टीम सबूत जुटाने में लगी हुई है।

चार अधिकारी निलंबित, SIT करेगी जांच

मुख्यमंत्री के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सवाल जो पूरे सिस्टम से पूछे जा रहे हैं

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों, प्रशासनिक जवाबदेही और भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। 15 परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, लेकिन उनके मन में आज भी एक ही सवाल गूंज रहा है,क्या यह त्रासदी रोकी जा सकती थी?जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इन सवालों के जवाब अधूरे रहेंगे। लेकिन इतना तय है कि लखनऊ का यह अग्निकांड आने वाले वर्षों तक लोगों के दिलों और यादों में जिंदा रहेगा।

 


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