होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

52 शक्तिपीठों में से एक प्रयागराज की ललिता देवी मंदिर: मां के तीन रूपों की होती है पूजा...

52 शक्तिपीठों में से एक प्रयागराज की ललिता देवी मंदिर: मां के तीन रूपों की होती है पूजा...

52 Shaktipeeth 2 Lalita Devi Temple: देवी सती के दुनियाभर में 52 शक्तिपीठ स्थापित हैं. इन सभी चमत्कारी और प्राचीन शक्तिपीठों की महिमा अपार है. इन्हीं में से एक हैं. माता ललिता देवी का मंदिर, ये प्रसिद्ध शक्तिपीठ यमुना नदी के किनारे मीरापुर मोहल्ले में स्थित हैं. जो माता के 52  शक्तिपीठों में से एक है. इस स्थान पर माता सती के दाहिने हाथ की उंगलियाँ गिरी थीं, ये स्थान भक्तों के लिए काफी पवित्र माना जाता है. 

मंदिर का पौराणिक महत्त्व:

ऐसा पौराणिक मान्यताओं नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष रूप से भक्तों की भारी भीड़ लगती है. बता दें कि यह मंदिर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम के समीप ही स्थित है, जिससे ये और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस मंदिर में सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है.

दर्शन करने से मिलता है विशेष लाभ:
  
लेकिन इसका महत्व नवरात्र के दिनों में काफी और बढ़ जाता है. माना जाता है कि मां ललिता का संगम स्नान के बाद दर्शन करने से विशेष लाभ प्राप्त है. इस मंदिर का उल्लेख देवी पुराण में मिलता है, साथ ही यहाँ पांडवों और महर्षि भारद्वाज ने भी पूजा की थी, ऐसा कहा जाता है. यह मंदिर ज्ञान की देवी और लालित्य (सौंदर्य) के रूप में भी पूजी जाती हैं.

तीन रूपों की होती है पूजा:

यहां पर मां ललिता देवी के तीन रूप पूजा अर्चना होती हैं. पहले सात की बालिका के रूप में त्रिपुर सुंदरी की, दूसरा 16 साल की षोडसी के रूप में और तीसरा मां ललिता त्रिपुर सुंदरी के युवा स्वरूप में मंदिर पर विद्यमान हैं. आपको बता दें कि, नवरात्र के पांचवें ललिता पंचमी का विशेष महत्व है इस दिन भक्त व्रत रख कर अपनी मनोकामना पूरी करते है. वहीं मत्सय पुराण में भी 108 शक्ति पीठों का वर्णन किया गया है.

ब्रह्मांड के परम शक्ति का प्रतिक:

जिसमें मां ललिता देवी मंदिर का जिक्र किया गया है.मां ललिता को षोडशी, त्रिपुर सुंदरी, राजराजेश्वरी और कामाक्षी  के नाम से भी जाना जाता है. इसे दस महाविद्याओं में से एक माना जाता हैं, और तो और माता ललिता को चंडी का भी स्थान दिया गया है. इसलिए पूजा चंडी पूजा इनकी तरह पूजा की जाती है. त्रिपुर उपनिषद के अनुसार, मां ललिता ब्रह्मांड के परम शक्ति का भी प्रतिक हैं. जिस वजह से ब्रह्मा, शिव और विष्णु से भी माता ललिता को ऊपर शासन करने वाली सर्वोच्च चेतना मानी गई है.


संबंधित समाचार