Trump-Iran Deal: मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की अमेरिकी कोशिशों के बीच एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ तनाव कम करने और परमाणु गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए किए गए समझौते के बावजूद क्षेत्र में हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इजरायल का कड़ा विरोध माना जा रहा है। इजरायल ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने के पक्ष में नहीं है। इसके चलते अमेरिका की कूटनीतिक पहल पर सवाल उठने लगे हैं और पूरे क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
इजरायल को क्यों नहीं मंजूर ट्रंप की डील?
जानकारों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को आर्थिक राहत देने और उसके परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए एक नई रूपरेखा तैयार की है। हालांकि इजरायल का मानना है कि ईरान पर केवल प्रतिबंधों और समझौतों से भरोसा नहीं किया जा सकता।इजरायल को आशंका है कि आर्थिक प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद ईरान दोबारा अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को मजबूत कर सकता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार किसी भी ऐसे समझौते को पर्याप्त नहीं मान रही, जिसमें ईरान के परमाणु ढांचे और उसके समर्थित नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त न किया जाए।
जारी हैं इजरायली सैन्य अभियान
ट्रंप प्रशासन के शांति प्रयासों के समानांतर इजरायल ने ईरान और उसके समर्थित संगठनों के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखी हैं। इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कूटनीति पर्याप्त नहीं है।रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ईरान से जुड़े रणनीतिक ठिकानों और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर उसकी क्षमताओं को कमजोर करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इससे अमेरिका और इजरायल के दृष्टिकोण में अंतर साफ दिखाई दे रहा है।
क्या बढ़ सकता है बड़े युद्ध का खतरा?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका और इजरायल के बीच इस मुद्दे पर समन्वय नहीं बनता, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। इजरायली कार्रवाई के जवाब में यदि ईरान कोई बड़ा सैन्य कदम उठाता है, तो हालात तेजी से व्यापक संघर्ष में बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में ट्रंप प्रशासन की शांति पहल को गंभीर झटका लग सकता है। साथ ही ईरान भी किसी समझौते से पीछे हटकर अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय ले सकता है, जिससे पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं के बीच बढ़ता मतभेद मध्य पूर्व में स्थायी शांति की राह को मुश्किल बना रहा है। जब तक सभी प्रमुख पक्षों की चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक क्षेत्र में युद्ध का खतरा पूरी तरह टलता नहीं दिख रहा है।