मंदसौर। मध्य प्रदेश सहित देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम देखने को मिल रही है। इसी बीच मंदसौर का करीब 92 साल पुराना द्विमुखी चिंताहरण गणेश मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा के कारण आस्था का खास केंद्र बना हुआ है। यहां भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमा विराजित है, जिसकी पीठ नहीं है और दोनों तरफ से अलग-अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं।
चिंताहरण गणेश भक्तों की मनोकामनाएं करते हैं पूरी
गणपति चौक स्थित मंदिर में प्रतिमा के आगे वाले हिस्से में भगवान गणेश को पांच सूंडों के साथ मुकुट धारण किए दिखाया गया है। यह स्वरूप युवावस्था का प्रतीक माना जाता है। वहीं पीछे की ओर एक सूंड, झुकी गर्दन और पगड़ी धारण किए गणेश जी का स्वरूप नजर आता है, जिसे भक्त सेठ स्वरूप और वृद्धावस्था से जोड़कर देखते हैं। मान्यता है कि चिंताहरण गणेश अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
तालाब से प्रकट होने की मान्यता
स्थानीय मान्यता के मुताबिक यह प्रतिमा नाहर सैय्यद तालाब से मिली थी। बताया जाता है कि धानमंडी निवासी मूलचंद सोनी को स्वप्न में तालाब में प्रतिमा होने का संकेत मिला। इसके बाद लोगों ने तलाश की तो मिट्टी और पत्थरों के बीच प्रतिमा मिली।
बैलगाड़ी से दूसरी जगह ले जाई जा रही थी मूर्ति
22 जून 1929 को प्रतिमा को बैलगाड़ी से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था, लेकिन इलाजी चौक पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ी। इसे भगवान की इच्छा मानकर वहीं प्रतिमा स्थापित कर दी गई। इसके बाद यही स्थान गणपति चौक के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
गणेश उत्सव में यहां विशेष पूजा, हवन और आरती होती है। हर बुधवार शाम होने वाली आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। तो वही आज गणेश चतुर्थी के मौके पर बड़ी संख्या में मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।