Mohan Cabinet Meeting: मध्य प्रदेश मंत्रालय में आज मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में जहां एक तरफ विकास कार्यों और आगामी सिंहस्थ को लेकर बड़े फैसले होंगे, वहीं दूसरी तरफ ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर मुख्यमंत्री का बेहद सख्त रुख देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री अपनी ए प्लस नोटशीट पर समय-सीमा के अंदर काम न होने को लेकर बेहद नाराज हैं और बैठक में कई विभागों के कामकाज की समीक्षा की जा सकती है।
कई विभाग रडार पर
कैबिनेट बैठक का सबसे गरमागरम मुद्दा तबादला नीति के क्रियान्वयन में हुई देरी का रहने वाला है। गौरतलब है कि पिछली कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने नई तबादला नीति को हरी झंडी दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने 'ए प्लस नोटशीट' जारी कर कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन कई विभागों ने मुख्यमंत्री और कैबिनेट के इन फैसलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नीति के अनुसार जो कदम उठाए जाने थे, वे जमीनी स्तर पर नहीं दिखे।
डेडलाइन खत्म, डेटा अधूरा
सरकारी निर्देशों के मुताबिक, सभी विभागों को अपने कर्मचारियों और खाली पदों का डेटा 31 मई 2026 तक ऑनलाइन अपडेट करना था ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। कई विभागों द्वारा इस समय-सीमा की अनदेखी किए जाने के बाद आज मुख्यमंत्री खुद इन निर्देशों की समीक्षा करेंगे और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
सिंहस्थ 2028 को लेकर मिलेगी मंजूरी
उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ महापर्व को लेकर सरकार अभी से युद्धस्तर पर तैयारियां कर रही है। आज की कैबिनेट बैठक में सिंहस्थ के बुनियादी ढांचे, सड़कों के चौड़ीकरण, संतों-श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विकास प्रस्तावों को आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी। इसके लिए बजट आवंटन का रास्ता भी साफ होगा।
मंत्रियों को ब्रीफ करेंगे मुख्यमंत्री
दरअसल, जून का महीना शुरू हो चुका है और मानसून की दस्तक के साथ ही प्रदेश भर में खरीफ फसलों की बोनी का काम रफ्तार पकड़ेगा, ऐसे में किसानों को खाद-बीज की किल्लत न हो, इसे लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद सभी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में खाद की उपलब्धता और सुचारू वितरण व्यवस्था को लेकर निर्देश देंगे। सरकार का मुख्य फोकस इस बात पर है कि सोसायटियों और सोर पर खाद के लिए किसानों की लंबी लाइनें न लगें और न ही ब्लैक मार्केटिंग की कोई शिकायत सामने आए।