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Kerala Politics Update: कौन हैं वीडी सतीशन ? जिन्हें मिली मुख्यमंत्री पद की कमान

Kerala Politics Update: कौन हैं वीडी सतीशन ? जिन्हें मिली मुख्यमंत्री पद की कमान

2026 केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF की निर्णायक जीत के पीछे विपक्ष के नेता वीडी सतीशन की रणनीतिक भूमिका को अहम माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके आत्मविश्वास भरे बयान और आक्रामक नेतृत्व शैली ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर दिखाई दिया।

Election Campaign में Satheesan का Bold Statement बना चर्चा का विषय

चुनाव के दौरान वीडी सतीशन ने सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि यदि UDF सत्ता में वापसी नहीं कर पाता, तो वे राजनीति से दूरी बना लेंगे। उनके इस आत्मविश्वासपूर्ण रुख ने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया, बल्कि पूरे अभियान को एक नई ऊर्जा भी दी।

2021 में बने Leader of Opposition, बदली कांग्रेस की दिशा

2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए रमेश चेन्निथला की जगह वीडी सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया था। राहुल गांधी के इस निर्णय को उस समय जोखिम भरा माना गया, लेकिन आगे चलकर यही कदम पार्टी के पुनर्गठन और मजबूती का आधार बन गया।

Student Politics से शुरू हुआ लंबा राजनीतिक सफर

वीडी सतीशन का राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। उनका जन्म 31 मई 1964 को एर्नाकुलम जिले के नेटूर में हुआ था। उन्होंने महाराजा कॉलेज और बाद में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और इसी दौरान केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। बाद में वे KSU के राज्य अध्यक्ष और भारतीय युवा कांग्रेस में राष्ट्रीय सचिव बने।

Strong Opposition Leader के रूप में बनी अलग पहचान

विपक्ष के नेता के रूप में सतीशन ने विधानसभा में सरकार के खिलाफ कई अहम मुद्दे उठाए। सौर घोटाला और बार रिश्वत मामले जैसे मामलों पर उनकी आक्रामक रणनीति ने उन्हें एक प्रभावशाली और मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। उनकी बहस शैली और डेटा-आधारित तर्कों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

Long Political Career और लगातार चुनावी जीत

हाई कोर्ट में वकालत कर चुके सतीशन ने 1990 के दशक में पहली बार परवूर सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि शुरुआती सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2001 में उन्होंने जीत हासिल की और लगातार 2006, 2011, 2016 और 2021 में भी अपनी सीट पर कब्जा बनाए रखा। उनका राजनीतिक अनुभव उन्हें केरल कांग्रेस का एक मजबूत स्तंभ बनाता है।

 

 

 


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