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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को मिलेगा 59 माह का लंबित एरियर

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ के पेंशनर्स को मिलेगा 59 माह का लंबित एरियर

छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित एरियर मामले में बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दो राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों का विवाद पेंशनभोगियों के अधिकारों में बाधा नहीं बन सकता। इस फैसले से छठवें और सातवें वेतन आयोग के तहत बकाया 59 माह के एरियर के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।

पुराने पेंशनर्स ने उठाया था भेदभाव का मुद्दा

यह मामला छत्तीसगढ़ पेंशनर्स समाज की याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करते समय सरकार ने कट-ऑफ तिथि निर्धारित कर पुराने पेंशनर्स को एरियर से वंचित कर दिया। इससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

सरकार ने पुनर्गठन अधिनियम का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत वित्तीय दायित्वों के बंटवारे के लिए मध्य प्रदेश की सहमति जरूरी है। वहीं पेंशनर्स की ओर से अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि एरियर भुगतान के लिए ऐसी अनुमति आवश्यक नहीं है।

पहले भी एरियर जारी करने का दिया गया था निर्देश

इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के आदेशों को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया था और 120 दिनों के भीतर पूरा एरियर जारी करने का निर्देश दिया था। साथ ही कहा गया था कि भुगतान के बाद यदि आवश्यक हो तो राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि मध्य प्रदेश सरकार से वसूल सकती है।

कोर्ट ने कहा- पेंशनर्स के अधिकार सर्वोपरि

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि प्रशासनिक और वित्तीय विवादों का असर उन कर्मचारियों पर नहीं पड़ना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक सरकारी सेवा दी है। अदालत ने माना कि पेंशनर्स का वैधानिक अधिकार सर्वोपरि है और उन्हें बकाया भुगतान से वंचित नहीं किया जा सकता। इस निर्णय के बाद प्रदेश के हजारों पेंशनर्स को जल्द एरियर मिलने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।


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