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क्या आशीर्वाद से बदली ‘हनुमान अंश’ की कहानी? अनुप्रिया नागर ने इंटरव्यू में बताया पूरा अनुभव

क्या आशीर्वाद से बदली ‘हनुमान अंश’ की कहानी? अनुप्रिया नागर ने इंटरव्यू में बताया पूरा अनुभव

रायपुर/मुंबई। फिल्म ‘हनुमान अंश’ की निर्माता अनुप्रिया नागर इन दिनों फिल्म की सफलता को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के सफर में एक ऐसा दौर भी आया, जब शुरुआती प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और इसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। इसी बीच अनुप्रिया नागर बागेश्वर धाम पहुंचीं और वहां धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की। अनुप्रिया नागर के मुताबिक, उस मुश्किल समय में उन्होंने फिल्म को लेकर अपनी चिंता साझा की थी। उनका कहना है कि मुलाकात के दौरान उन्हें भरोसा देते हुए कहा गया था कि “चिंता मत करो, हनुमान जी तुम्हारे साथ हैं।” अनुप्रिया के अनुसार, इन शब्दों ने उन्हें कठिन दौर में हिम्मत दी। अब फिल्म की सफलता के बाद अनुप्रिया नागर ने एक बार फिर बागेश्वर धाम सरकार से मुलाकात की। मुंबई में हुई इस मुलाकात को उन्होंने आभार और कृतज्ञता से जोड़ा। INH को दिए इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म के पूरे सफर को अपने नजरिए से ‘मिरेकल’ बताया।

मुश्किल दौर में थी ‘हनुमान अंश’

‘हनुमान अंश’ के रिलीज के बाद फिल्म को शुरुआत में अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। शुरुआती कमाई को लेकर चर्चाओं के बीच फिल्म के सिनेमाघरों में आगे के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठने लगे थे। इसी दौर में निर्माता अनुप्रिया नागर बागेश्वर धाम पहुंचीं। उन्होंने फिल्म से जुड़ी अपनी चिंता धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने रखी। अनुप्रिया के मुताबिक, वहां उन्हें सकारात्मक भरोसा मिला, जिसे उन्होंने अपने लिए महत्वपूर्ण अनुभव बताया।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात का क्या रहा असर?

अनुप्रिया नागर के अनुसार, बागेश्वर धाम में हुई मुलाकात के दौरान उन्हें हनुमान जी पर विश्वास रखने की बात कही गई। उनके मुताबिक, उस समय मिले इस भरोसे ने उनका मनोबल बढ़ाया। हालांकि, फिल्म की सफलता और उस मुलाकात के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध स्थापित करने का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं रखा गया है। अनुप्रिया इसे अपनी आस्था और व्यक्तिगत अनुभव के तौर पर देखती हैं।

सफलता के बाद दोबारा बागेश्वर धाम सरकार से मिलीं अनुप्रिया

फिल्म के सफल होने के बाद अनुप्रिया नागर ने दोबारा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की। इस दौरान फिल्म की सफलता पर उन्हें और उनकी टीम को बधाई दी गई तथा आशीर्वाद दिया गया। अनुप्रिया ने इस मुलाकात को केवल फिल्म की कामयाबी से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि इसे अपने लिए धन्यवाद और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर बताया।

अनुप्रिया नागर ने ‘मिरेकल’ क्यों कहा?

INH के इंटरव्यू में अनुप्रिया नागर ने ‘हनुमान अंश’ के सफर को ‘मिरेकल’ यानी चमत्कार जैसा अनुभव बताया। उनके अनुसार, फिल्म के मुश्किल दौर में मिला विश्वास उनके लिए महत्वपूर्ण रहा और सफलता मिलने के बाद उसी व्यक्ति से मिलकर आभार जताना उनके लिए विशेष क्षण था। उनका कहना है कि संतों का आशीर्वाद उनके लिए किसी भी व्यावसायिक उपलब्धि से अधिक मायने रखता है।

‘हनुमान अंश’ सिर्फ फिल्म नहीं, आस्था से जुड़ा प्रयास

अनुप्रिया नागर के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ को केवल मनोरंजन के नजरिए से नहीं बनाया गया। फिल्म के जरिए आस्था, संस्कार और सनातन परंपरा से जुड़े संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। निर्माता के लिए फिल्म की सफलता का अर्थ केवल बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन नहीं, बल्कि दर्शकों तक इस विचार और संदेश का पहुंचना भी है।

क्या फिल्म की सफलता का बागेश्वर धाम से है कनेक्शन?

‘हनुमान अंश’ के शुरुआती संघर्ष, बागेश्वर धाम में हुई मुलाकात और फिल्म की सफलता के बाद अनुप्रिया नागर की दोबारा मुलाकात ने इस कहानी को चर्चा में ला दिया है।हालांकि, फिल्म की सफलता को किसी आध्यात्मिक आशीर्वाद का प्रत्यक्ष परिणाम बताना एक आस्था आधारित व्याख्या है। अनुप्रिया नागर ने भी इसे अपने व्यक्तिगत अनुभव और विश्वास के रूप में पेश किया है। फिल्म की सफलता के पीछे दर्शकों की प्रतिक्रिया, प्रचार, कंटेंट और अन्य व्यावसायिक कारणों की भूमिका को अलग-अलग देखा जा सकता है। पूरी कहानी और अनुप्रिया नागर का इंटरव्यू देखने के बाद आप जान सकते हैं कि ‘हनुमान अंश’ के मुश्किल दौर से सफलता तक का उनका अनुभव कैसा रहा और बागेश्वर धाम से जुड़ी इस मुलाकात को वह किस नजरिए से देखती हैं।

 


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