ASI Shiv Singh Jatav: सीमा सुरक्षा बल के ग्वालियर टेकनपुर स्थित परिसर से एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां 37 सालों तक नौकरी करने वाले बीएसएफ के एक सहायक उप निरीक्षक को उनके रिटायरमेंट से महज एक दिन पहले विभाग ने कस्टडी में ले लिया। 31 मई 2026 को सम्मान के साथ सेवानिवृत्त होने जा रहे एएसआई शिव सिंह जाटव इस वक्त पनी नियुक्ति के समय जमा की गई शैक्षणिक योग्यता यानी 10वीं की अंकसूची को लेकर विवादों के घेरे में आ गए हैं।
परिसर छोड़ने पर लगी रोक
विभाग ने एएसआई शिव सिंह जाटव के 31 मई के रिटायरमेंट पर ऐन वक्त पर रोक लगाते हुए उन्हें बिना पूर्व अनुमति के बीएसएफ परिसर से बाहर जाने पर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। विभागीय जांच और कागजी कार्रवाई पूरी होने तक एएसआई शिव सिंह को बाकायदा फोर्स कस्टडी में रख दिया गया है, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें।
खुला 37 साल पुराना राज
इस पूरे विवाद की जड़ें 37 साल पहले हुई एक भर्ती से जुड़ी हैं। शिव सिंह जाटव की नियुक्ति 16 अक्टूबर 1989 को BSF में आरक्षक/कांस्टेबल के पद पर की गई थी। इसके बाद उत्कृष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए साल 2007 में उन्हें हेड कांस्टेबल और बाद में प्रमोट कर एएसआई पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
क्या है अंकसूची का विवाद?
दरअसल, 22 मई 2026 को बीएसएफ कमांडेंट की ओर से शिव सिंह को एक नोटिस थमाया गया था। आरोप के मुताबिक, साल 1989 में नौकरी हासिल करने के लिए शिव सिंह ने स्वयं को 10वीं पास बताते हुए जो हाईस्कूल की अंकसूची विभाग के सामने प्रस्तुत की थी, वह संदिग्ध है। विभाग का दावा है कि शिव सिंह वास्तव में हाईस्कूल उत्तीर्ण नहीं हैं और गलत दस्तावेजों के सहारे इतने सालों तक नौकरी की गई।
ASI पहुंचा उच्च न्यायालय
अपनी सेवानिवृत्ति से ठीक पहले हुई कार्रवाई के खिलाफ अब पीड़ित अधिकारी ने उच्च न्यायालय में दरवाजा खटखटाया है। एएसआई शिव सिंह जाटव ने अपनी कस्टडी और विभाग के एक्शन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में याचिका दायर कर दी है। अब मामला कोर्ट की दहलीज पर है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अदालत इस 37 साल पुराने दस्तावेज विवाद और रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले दी गई फोर्स कस्टडी पर क्या फैसला सुनाती है।