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घृष्णेश्वर भगवान शिव का 12 ज्योतिर्लिंग: भक्तों के महान भक्ति का है प्रतीक...

घृष्णेश्वर भगवान शिव का 12 ज्योतिर्लिंग: भक्तों के महान भक्ति का है प्रतीक...

Ghrishneshwar Jyotirlinga: भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग हैं, जो महाराष्ट्र के दौलताबाद के समीप वेरुल गाँव में स्थापित है. ये मंदिर एलोरा गुफाओं से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर बना है. घृष्णेश्वर मंदिर महादेव का अंतिम बारहवां ज्योतिर्लिंग कहा जाता है. इस ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिवपुराण में वर्णित है, कहा जाता है कि भगवान शिव भक्त घुश्मा की भक्ति से प्रसन्न होकर ने इस स्थान पर निवास करने हैं. 

ऐसे हुई थी घृष्णेश्वर की स्थापना:

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इसी स्थान पर परम भक्त घुश्मा के मरे हुए पुत्र को भगवान शिव ने जीवित किया था, और जिसके बाद घुश्मेश्वर के रूप में इसी स्थान पर निवास करने हैं. भगवान शिव का ये ज्योतिर्लिंग भक्तों के प्रति उनके प्रेम और उनके महान भक्ति का प्रतीक माना जाता है. शिवपुराण से मिली जानकारी के मुताबिक जो भक्ति इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है, और उन्हें मोक्ष और भोग की प्राप्ति होती है. 

ज्योतिर्लिंगों की यात्रा फलदायी:

ये सभी ज्योतिर्लिंग गहरी श्रद्धा, प्राचीन ज्ञान और दिव्यता के जीवंत का प्रतीक हैं. प्रत्येक मंदिर धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिक है.बतादें कि, इन ज्योतिर्लिंगों की पूजा शिव-पर्वों और यात्रा को लेकर फलदायी अत्यंत और शुभ माना जाता है. भक्तजन श्रद्धा पूर्वक दूध, शहद जल और बिल्वपत्र अर्पित कर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं, और वह शिव जी की ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ने की कोशिश करते हैं.


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