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आस्था का महापर्व: केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से बरसे फूल...

आस्था का महापर्व: केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से बरसे फूल...

रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड। देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट आज पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरे धाम में “हर-हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

भक्तों की भारी भीड़, रात से लगी कतारें

कपाट खुलने के साथ ही हजारों श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं, वहीं कई श्रद्धालु रात से ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। पहाड़ी रास्तों की कठिनाई और ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह देखने लायक रहा।

51 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर

इस विशेष अवसर पर मंदिर को 51 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर बेहद आकर्षक और भव्य नजर आया। रंग-बिरंगे फूलों की सजावट ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

कपाट खुलते ही मंदिर परिसर में हेलीकॉप्टर के जरिए पुष्प वर्षा की गई। आसमान से बरसते फूलों ने इस पवित्र क्षण को और भी दिव्य बना दिया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किए दर्शन

इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी केदारनाथ धाम पहुंचे। उन्होंने बाबा केदारनाथ और मंदिर परिसर में स्थित नंदी बाबा के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था की है। आर्मी और अन्य सुरक्षा बलों के जवान तैनात किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने में जुटे हुए हैं। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी भक्तों का उत्साह चरम पर है। प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालु शांतिपूर्ण तरीके से बाबा केदारनाथ के दर्शन कर रहे हैं।

भगवान शिव का दिव्य निवास

वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ Kedarnath Dham के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित यह पवित्र धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धाम साल में लगभग 6 महीने तक बर्फबारी के कारण बंद रहता है, इसलिए इसे भगवान शिव का दिव्य निवास भी कहा जाता है।

क्यों अलग है केदारनाथ का शिवलिंग?

केदारनाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग अपने अनोखे स्वरूप के कारण विशेष माना जाता है। जहां अधिकतर शिवलिंग गोलाकार होते हैं, वहीं केदारनाथ का शिवलिंग त्रिकोणीय और बैल की पीठ (कूबड़) जैसा दिखाई देता है। इसकी ऊंचाई और चौड़ाई लगभग 12-12 फीट मानी जाती है, यह प्राकृतिक रूप में स्थापित माना जाता है, मंदिर परिसर में माता पार्वती और पांडवों की मूर्तियां भी मौजूद हैं, यही विशेष आकार इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाता है।

महाभारत से जुड़ी है केदारनाथ की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को अपने ही कुल के लोगों की हत्या का भारी पश्चाताप हुआ। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए वे भगवान शिव की शरण में पहुंचे। लेकिन भगवान शिव उनसे प्रसन्न नहीं थे और उनसे बचने के लिए उन्होंने नंदी (बैल) का रूप धारण कर लिया और हिमालय में छिप गए।

भीम और शिव की लीला: यहीं से शुरू हुआ रहस्य

जब पांडवों ने शिव को ढूंढ लिया, तो उन्होंने बैल रूप में जमीन में समाने का प्रयास किया। तभी भीम ने बैल की पूंछ पकड़ ली, जिससे बैल का कूबड़ (पीठ) केदारनाथ में प्रकट हुआ यही कूबड़ आज त्रिकोणीय शिवलिंग के रूप में पूजित है।

पंचकेदार: शिव के शरीर के पांच भाग

भगवान शिव के बैल रूप के अलग-अलग अंग हिमालय के विभिन्न स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंचकेदार कहा जाता है, केदारनाथ – कूबड़ (पीठ), तुंगनाथ – भुजाएं, रुद्रनाथ – मुख, मदमहेश्वर – नाभि, कल्पेश्वर – जटा शामिल है, वहीं शिव का सिर Pashupatinath Temple में प्रकट हुआ माना जाता है।

आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम

केदारनाथ का त्रिकोणीय शिवलिंग सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भगवान शिव की लीला, पांडवों की भक्ति और हिमालय की आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है। यही कारण है कि केदारनाथ धाम न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। केदारनाथ का शिवलिंग अपने अद्वितीय आकार और पौराणिक कथा के कारण विशेष महत्व रखता है। यह हमें सिखाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं, लेकिन सच्ची भक्ति और पश्चाताप से उन्हें प्राप्त किया जा सकता है।


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