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एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान किसान, समिति प्रबंधन पर उठे सवाल

एक-एक बोरी खाद के लिए परेशान किसान, समिति प्रबंधन पर उठे सवाल

प्रदेश सरकार किसानों को खेती के लिए समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन कई बार जमीनी स्तर पर लापरवाही और अव्यवस्था के कारण किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम कटली सेवा सहकारी समिति से सामने आया है, जहां किसानों ने खाद वितरण में अनियमितता और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

खाद लेने के लिए भटक रहे किसान

खेती का सीजन शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में किसान डीएपी और यूरिया लेने सेवा सहकारी समिति पहुंच रहे हैं। किसानों का कहना है कि समिति में खाद उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं दी जा रही। किसानों के अनुसार, बेहतर उत्पादन के लिए प्रति एकड़ कम से कम एक से दो बोरी डीएपी और यूरिया की जरूरत होती है, लेकिन समिति प्रबंधन दो से चार एकड़ जमीन वाले किसानों को केवल एक-एक बोरी खाद देकर वापस भेज रहा है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

बाजार से महंगा खाद खरीदने की मजबूरी

किसानों का आरोप है कि यदि समिति से पर्याप्त खाद नहीं मिला तो उन्हें खुले बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि बाजार में पहले से ही खाद की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे खेती की लागत और बढ़ जाएगी। छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों ने चिंता जताई है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कई किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो वे खेती का रकबा कम करने को मजबूर हो जाएंगे।

समिति प्रबंधक पर लगे लापरवाही के आरोप

पूरे मामले में किसानों ने समिति प्रबंधक दिनेश सेन पर मनमानी और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद खाद वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। जब इस संबंध में समिति प्रबंधक से बातचीत करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कैमरे के सामने कोई स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया। उनका रवैया भी किसानों की नाराजगी का कारण बना।

बैंक मैनेजर ने कही जांच की बात

मामले को लेकर डोंगरगढ़ स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा के बैंक मैनेजर योगेंद्र शर्मा से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि शासन और कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार शुरुआती चरण में प्रति एकड़ एक बोरी डीएपी और एक बोरी यूरिया किसानों को दिया जाना तय है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में खाद की कोई कमी नहीं है। साथ ही कहा कि यदि समिति स्तर पर निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।

शासन की योजनाओं पर उठ रहे सवाल

प्रदेश सरकार लगातार किसानों को राहत देने और खेती को मजबूत बनाने के लिए योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो खाद की कालाबाजारी जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। किसानों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें समय पर पर्याप्त खाद मिल सके।


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