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EPFO का बड़ा फैसला! PF के नियमों में हुए बड़े बदलाव, जानें कर्मचारियों पर क्या होगा असर

EPFO का बड़ा फैसला! PF के नियमों में हुए बड़े बदलाव, जानें कर्मचारियों पर क्या होगा असर

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भविष्य निधि (PF) से जुड़े कई अहम नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत 15,000 रुपये की वैधानिक वेतन सीमा पर 12 प्रतिशत पीएफ अंशदान अनिवार्य रहेगा। यानी यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन इससे अधिक है, तब भी अनिवार्य पीएफ योगदान 1,800 रुपये प्रति माह ही होगा। कर्मचारी यदि अधिक राशि पीएफ में जमा कराना चाहता है तो यह पूरी तरह उसकी स्वेच्छा पर निर्भर करेगा।

अतिरिक्त पीएफ जमा करना होगा वैकल्पिक

ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी अपनी इच्छा से अधिक पीएफ कटवा सकता है, लेकिन नियोक्ता (कंपनी) पर समान राशि जमा करने की बाध्यता नहीं होगी। कंपनी चाहे तो अतिरिक्त योगदान कर सकती है या केवल कानूनी सीमा तक ही अपना हिस्सा जमा करेगी। साथ ही कर्मचारी और कंपनी भविष्य में इस अतिरिक्त योगदान को कम या बंद भी कर सकते हैं।

पीएफ निकासी की प्रक्रिया हुई पहले से आसान

ईपीएफओ ने पीएफ खाते से एडवांस निकालने के नियमों को भी सरल बनाया है। पहले जहां अलग-अलग उद्देश्यों के लिए 13 श्रेणियां थीं, अब उन्हें घटाकर केवल तीन प्रमुख श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें गंभीर बीमारी, शिक्षा और विवाह जैसी आवश्यक जरूरतें, आवास से जुड़े कार्य और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। इससे कर्मचारियों के लिए आवेदन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है।

100 प्रतिशत तक एडवांस निकालने की सुविधा

नए प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी अपने पीएफ खाते में जमा राशि का 100 प्रतिशत तक एडवांस निकाल सकेंगे। हालांकि इसके लिए यह शर्त लागू रहेगी कि निकासी के बाद खाते में कुल जमा राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा शेष रहना चाहिए। यानी पूरा पीएफ बैलेंस एक साथ निकालने की अनुमति नहीं होगी।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए भी बदले नियम

ईपीएफओ ने ठेका कर्मचारियों के पीएफ को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की है। यदि कोई ठेकेदार ईपीएफओ में पंजीकृत नहीं है, तो उसके कर्मचारियों के पीएफ अंशदान की जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता कंपनी की होगी। इसके अलावा सभी कंपनियों को नए नियम लागू होने के 15 दिनों के भीतर कर्मचारियों की जानकारी के साथ एकीकृत रिटर्न दाखिल करना होगा, जिसमें यूएएन, पैन और वेतन संबंधी विवरण देना अनिवार्य रहेगा।

कर्मचारियों और कंपनियों दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से पीएफ प्रबंधन अधिक पारदर्शी और सरल होगा। कर्मचारियों को जरूरत के समय धन निकालने में आसानी मिलेगी, जबकि कंपनियों को वेतन संरचना और अनुपालन प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने में सुविधा होगी।


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