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NHAI टोल घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन, फर्जी सॉफ्टवेयर से 95% रकम की हेराफेरी; 14 ठिकानों पर छापा

NHAI टोल घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन, फर्जी सॉफ्टवेयर से 95% रकम की हेराफेरी; 14 ठिकानों पर छापा

लखनऊ। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स वसूली में कथित बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए टोल वसूली के मामले में ईडी की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीमों ने एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत चल रही जांच में ईडी ने 1.03 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी के अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डिजिटल डेटा और कथित फर्जी सॉफ्टवेयर से जुड़े फॉरेंसिक साक्ष्य बरामद किए हैं।

NHAI के सिस्टम के समानांतर चल रहा था फर्जी सॉफ्टवेयर

ईडी की जांच के मुताबिक, टोल ऑपरेटरों और आईटी से जुड़े कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से NHAI के आधिकारिक सिस्टम के समानांतर एक अनधिकृत सॉफ्टवेयर ऐप संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि इस सिस्टम के माध्यम से सामान्य वाहनों के साथ-साथ ओवरलोडेड कमर्शियल वाहनों से भी टोल वसूला जाता था। हालांकि, वसूली की रसीद NHAI के आधिकारिक सिस्टम से जारी होने के बजाय कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती थी।

सिर्फ 5 फीसदी रकम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने का आरोप

जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, टोल वसूली की कुल रकम का कथित तौर पर केवल 5 प्रतिशत हिस्सा ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता था। बाकी करीब 95 प्रतिशत रकम को निजी और कथित बेनामी बैंक खातों में भेजे जाने का आरोप है।

ईडी अब इस रकम के लेनदेन और उससे जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है, ताकि कथित मनी ट्रेल की पूरी कड़ी सामने लाई जा सके।

UP STF की FIR के बाद शुरू हुई ED की जांच

यह मामला उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के बाद जांच एजेंसियों के सामने आया। मामले की जांच के दौरान NHAI के आंतरिक रिकॉर्ड और तकनीकी फॉरेंसिक जांच में कथित समानांतर और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी के लखनऊ जोनल ऑफिस ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद एजेंसी ने कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों और अलग-अलग राज्यों में मौजूद लिंक को खंगालना शुरू किया।

छापेमारी में सर्वर डेटा और फर्जी FASTag रसीदें जब्त

तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं। इनमें सर्वर से जुड़ा डेटा, बैंक खातों की जानकारी, कथित फर्जी FASTag रसीदें और संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी इन साक्ष्यों के आधार पर टोल वसूली से लेकर रकम को अलग-अलग खातों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को समझने में जुटी है।

अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश

ईडी अब इस मामले की कथित मनी ट्रेल को ट्रैक कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टोल से जुटाई गई अवैध रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और इसमें टोल ऑपरेटरों, आईटी कर्मियों, बिचौलियों या अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। जांच का फोकस कथित नेटवर्क के मुख्य संचालकों और अंतिम लाभार्थियों की पहचान पर है। ईडी द्वारा बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है।


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